डॉक्टर हफ़्तों से लापता; ‘Not For Sale’ दवाएं ₹2 से ₹5 में बेचीं, पूछने पर रिपोर्टर से ऑन-कैमरा हाई-वोल्टेज ड्रामा
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट (बेतिया/चनपटिया): बिहार के बेतिया जिले के चनपटिया राजकीय पशु चिकित्सालय से एक बेहद सनसनीखेज खोजी रिपोर्ट (Investigative Report) सामने आई है। जब हमारे संवाददाता ने अस्पताल की बदहाली को कैमरे पर दिखाना चाहा, तो सच छुपाने के लिए वहां के स्टाफ ने रिपोर्टर के साथ हाथापाई और धक्का-मुक्की की। ऑन-कैमरा लाइव सबूतों के साथ देखिए कैसे बेज़ुबान जानवरों की जान के साथ खिलवाड़ और सरकारी फंड की खुली लूट मची है।
रिपोर्टर से हाथापाई और बदतमीजी : ग्राउंड जीरो पर कवरेज कर रहे पत्रकार को रोकने के लिए अस्पताल स्टाफ ने आक्रामक रुख अपनाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बंद कराने के लिए पत्रकार के साथ शारीरिक धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया गया।
डॉक्टर लापता, गार्ड संभाल रहे कमान : अस्पताल से मुख्य डॉक्टर पूरी तरह नदारद मिले। उनकी अनुपस्थिति में एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ और गार्ड ही पूरे अस्पताल का संचालन और दवा वितरण कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने कैमरे पर गवाही दी कि डॉक्टर साहब हफ़्तों और महीनों में कभी-कभार ही अस्पताल में नजर आते हैं।
स्टाफ की ‘1 घंटे’ वाली लाइव बहानेबाजी: जब रिपोर्टर ने डॉक्टर के बारे में पूछा, तो वहां मौजूद कर्मी पिछले 20 मिनट से लगातार एक ही रटा-रटाया बहाना बना रहे थे कि “डॉक्टर साहब बस एक घंटे बाद आ जाएंगे”, जबकि वे कब से गायब हैं किसी को नहीं पता।
डेटा ऑपरेटर बना डॉक्टर, थमाई गलत दवा: मवेशी पालकों को बिना किसी डॉक्टर की पर्ची के डेटा एंट्री ऑपरेटर दवाएं बांट रहे हैं। हद तो तब हो गई जब किसान ने गाय के बुखार की दवा मांगी, और अनपढ़ स्टाफ ने उसे लूज मोशन (दस्त) की दवा थमा दी। स्टाफ को दवाओं के नाम तक नहीं पता।
‘Not For Sale’ दवाओं की अवैध वसूली: जो सरकारी दवाएं पशुपालकों को मुफ़्त मिलनी चाहिए, जिनपर साफ़ लिखा है ‘नॉट फॉर सेल’, उनके लिए ₹2 से ₹5 की अवैध वसूली की जा रही है।
डॉक्टर के केबिन पर महिला कर्मी का कब्ज़ा: डॉक्टर के एब्सेंस में एक महिला कर्मचारी डॉक्टर के केबिन के अंदर टेबल पर बैठकर समय काट रही थीं।
काम छोड़कर रिपोर्टर का वीडियो बनाना: जब रिपोर्टर ने इस मनमानी पर सवाल उठाया, तो महिला कर्मी अपना मुख्य काम छोड़कर उल्टा रिपोर्टर का ही मोबाइल से वीडियो बनाने लगीं ताकि उन्हें डराया जा सके।
बात करने की ‘टोन’ पर तीखी बहस: अपनी लापरवाही पकड़े जाने पर महिला कर्मी रिपोर्टर से सम्मान (रिस्पेक्ट) और बात करने के तरीके (Tone) को लेकर ऑन-कैमरा बहस करने लगीं, जिसपर रिपोर्टर ने भी कड़ा रुख अपनाया।
एनिमल एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह ठप : जानवरों के आपातकालीन इलाज के लिए अस्पताल की वैन/एम्बुलेंस सेवा बंद पड़ी है। सरकारी हेल्पलाइन पर फोन करने पर किसानों को सिर्फ बार-बार कॉल करने को कहा जाता है, कोई समय पर मदद नहीं मिलती।
बिना ID कार्ड के टीकाकरण : अस्पताल में पशुओं का टीकाकरण करने वाले कर्मियों के पास कोई आधिकारिक सरकारी पहचान पत्र (ID Card) तक नहीं है।
जनता के टैक्स के पैसे पर चल रही इस मनमानी का जिम्मेदार कौन?
एक सरकारी अस्पताल में पत्रकार पर हमला करना और बेज़ुबानों के इलाज के नाम पर अवैध वसूली करना साफ़ दर्शाता है कि यहाँ स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन की कोई निगरानी नहीं है। गैर-मेडिकल स्टाफ किसके आदेश पर इलाज कर रहा है? क्या बेतिया प्रशासन और पशुपालन विभाग इन भ्रष्ट और हिंसक कर्मचारियों पर कोई सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा?
कैमरे पर रिकॉर्ड हुई स्टाफ की गुंडागर्दी, अवैध वसूली और बदहाली की पूरी वीडियो रिपोर्ट नीचे ज़रूर देखें।
(Writer-Riya Mishra)





