भोजपुर/आरा: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना अंतर्गत बिलौटी गांव में पुलिस और एक स्थानीय युवक के बीच हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा एक दुखद मोड़ पर समाप्त हो गया है। पुलिस मुठभेड़ (हाफ एनकाउंटर) में घायल हुए 30 वर्षीय युवक भरत भूषण तिवारी की पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी तनाव व्याप्त है। जहां एक तरफ पुलिस इसे आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी कार्रवाई बता रही है, वहीं परिजन और स्थानीय ग्रामीण इसे ‘सरेआम फर्जी एनकाउंटर’ करार देकर न्याय की मांग कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शाहबाद रेंज के डीआईजी (DIG) डॉ. सत्यप्रकाश और भोजपुर एसपी राज की अनुशंसा पर शाहपुर के थानाध्यक्ष (SHO) राजेश कुमार मालाकार, एक सब-इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबलों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। घटना की उच्चस्तरीय प्रशासनिक और मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
सत्यापित जानकारियों के अनुसार, बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी (पिता- काशीनाथ तिवारी) पिछले कुछ दिनों से अवैध हथियार के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर रहा था। पुलिस को इनपुट मिला था कि वह अवैध हथियार चमकाकर लोगों को डरा रहा है। जब शाहपुर पुलिस और बिहार एसटीएफ (STF) की टीम उसे गिरफ्तार करने पहुंची, तो स्थिति अनियंत्रित हो गई।
पुलिस का दावा है कि आरोपी ने टीम को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोलियां चलाईं, जो भरत तिवारी के दोनों घुटनों और जांघ में लगीं (कुल 4 गोलियां)। उसे गंभीर हालत में पहले स्थानीय अस्पताल और फिर पटना PMCH रेफर किया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई।
पुलिस का पक्ष: “आत्मरक्षा में चलानी पड़ी गोली”
भोजपुर पुलिस और जिला प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह कानून सम्मत और आत्मरक्षार्थ थी।
पुलिस पर पिस्टल तानने का वीडियो: एनकाउंटर से ठीक पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें भरत तिवारी खुलेआम ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों पर पिस्टल ताने नजर आ रहा है। वह वीडियो में पुलिस को अपशब्द कहते हुए धमकी दे रहा है कि “पीछे हट जाओ, नहीं तो ठोक दूंगा।”
ताबड़तोड़ फायरिंग: पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जब टीम ने उसे घेरकर पकड़ने की कोशिश की, तो आरोपी ने पुलिस पर 8 से 10 राउंड गोलियां चलाईं। पुलिसकर्मियों और आम जनता की जान बचाने के लिए पुलिस को मजबूरन पैरों पर गोली चलानी पड़ी। मौके से एक अवैध पिस्टल और कारतूस भी बरामद किए गए हैं।
परिजनों और चश्मदीदों का दावा: “सरेंडर के बाद मारी गई गोली”
दूसरी तरफ, भरत तिवारी के परिवार और ग्रामीणों ने पुलिस की थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है।
फेसबुक लाइव और सरेंडर का दावा: परिजनों का आरोप है कि भरत ने एनकाउंटर से पहले फेसबुक लाइव किया था और पुलिस के सामने अपनी पिस्टल नीचे फेंककर पूरी तरह आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया था।
मां और पिता के गंभीर आरोप: रोती-बिलखती मां आशा देवी और पूर्व कांस्टेबल रहे पिता काशीनाथ तिवारी ने मीडिया से कहा, “मेरा बेटा कोई पेशेवर अपराधी या आतंकवादी नहीं था। उस पर पहले से कोई FIR या आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं था। जब उसने हथियार फेंक दिए थे, तो पुलिस उसे जिंदा पकड़ सकती थी, लेकिन जानबूझकर उसे करीब से 4 गोलियां मारी गईं।”
मानसिक स्थिति पर सवाल: पुलिस ने शुरुआत में भरत को मानसिक रूप से विक्षिप्त या कमजोर बताया था। इस पर परिजनों ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि वह मानसिक रूप से बीमार था, तो उसे इलाज या कस्टडी में लेने के बजाय सीधे गोलियों से क्यों भूना गया?
‘’प्रशासन विरोधी’ या ‘क्रांतिकारी’? क्या है ‘शहीद’ के दर्जे की मांग?
भरत तिवारी के फेसबुक प्रोफाइल और सोशल मीडिया इतिहास को खंगालने पर एक अलग ही कहानी सामने आती है। वह बीएससी (B.Sc) फाइनल ईयर का छात्र था और नौकरी न मिलने के कारण व्यवस्था से बेहद क्षुब्ध था।
जवइनिया कटाव पीड़ितों की लड़ाई: वह स्थानीय मुद्दों, विशेषकर गंगा नदी के कटाव से विस्थापित हुए ‘जवइनिया कटाव पीड़ितों’ के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर लगातार अधिकारियों और नेताओं के चक्कर काट रहा था।
सिस्टम के खिलाफ आक्रोश: उसके सोशल मीडिया पोस्ट्स सरकारी तंत्र की नाकामियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ तीखे बयानों से भरे पड़े थे। अपनी मौत से कुछ दिन पहले भी उसने चेतावनी भरे लहजे में पोस्ट किया था कि यदि बाढ़ पीड़ितों को नहीं बसाया गया तो वह बड़ा कदम उठाएगा। इसी कारण सोशल मीडिया का एक बड़ा धड़ा उसे “सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने वाला क्रांतिकारी” बता रहा है और जनभावनाओं के तहत उसे ‘शहीद का दर्जा’ दिए जाने की मांग कर रहा है।
सड़क जाम, लाठीचार्ज और भारी तनाव
18 जून को जब पोस्टमार्टम के बाद भरत तिवारी का शव बिलौटी गांव पहुंचा, तो हजारों की संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित भीड़ ने शव को सड़क पर रखकर आरा-बक्सर फोरलेन (हाईवे) को घंटों तक जाम रखा।
प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए जब पुलिस ने प्रयास किया, तो भीड़ की ओर से कथित तौर पर पत्थरबाजी की गई, जिसके जवाब में पुलिस ने कड़ा लाठीचार्ज किया। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए गांव और बक्सर हाईवे के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल और दंगा नियंत्रण वाहनों को तैनात किया गया है। स्थानीय सांसद सुदामा प्रसाद सहित कई राजनीतिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी (CBI) या न्यायिक जांच की मांग की है ताकि एनकाउंटर का पूरा सच जनता के सामने आ सके।
(Writer: Riya Mishra)




