नई दिल्ली। आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और करोड़ों करदाताओं के लिए समय पर रिटर्न भरना बेहद जरूरी है। वेतनभोगी (Salaried) कर्मचारियों और सामान्य करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। वहीं, जिन व्यापारियों, पेशेवरों (Professionals) और फ्रीलांसर्स के खातों का ऑडिट आवश्यक नहीं है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न भरते समय जल्दबाजी या लापरवाही महंगी पड़ सकती है। गलत जानकारी, अधूरी आय का विवरण या गलत ITR फॉर्म चुनने जैसी गलतियों के कारण आयकर विभाग की ओर से नोटिस भी जारी किया जा सकता है। इसलिए ITR दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेजों का सावधानीपूर्वक मिलान करना जरूरी है।
सबसे पहले अपनी आय के स्रोत के अनुसार सही ITR फॉर्म का चयन करें। यदि आपकी आय वेतन, मकान किराया, व्यवसाय, पेशा या पूंजीगत लाभ (Capital Gain) से होती है, तो उसी के अनुरूप ITR-1 से ITR-7 तक सही फॉर्म चुनना आवश्यक है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर उसे डिफेक्टिव रिटर्न माना जा सकता है।
रिटर्न भरने से पहले आयकर पोर्टल पर उपलब्ध Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS का मिलान अवश्य करें। इन दस्तावेजों में आपकी आय, TDS, टैक्स भुगतान और अन्य वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड दर्ज होता है। कई बार करदाता बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज या शेयरों से प्राप्त डिविडेंड की जानकारी देना भूल जाते हैं, जिससे बाद में आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
यदि आपने Old Tax Regime चुना है, तो आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत PPF, LIC, ELSS जैसी योजनाओं में निवेश और धारा 80D के तहत मेडिकल इंश्योरेंस पर मिलने वाली टैक्स छूट का दावा करना न भूलें। इससे आपकी कर देनदारी कम हो सकती है।
इसके अलावा, अपने सभी सक्रिय बैंक खातों की सही जानकारी रिटर्न में दर्ज करें और जिस खाते में रिफंड प्राप्त करना चाहते हैं, उसे प्राथमिक (Primary) बैंक अकाउंट के रूप में चिन्हित करें।
ध्यान देने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल ITR दाखिल करना ही पर्याप्त नहीं है। रिटर्न सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) करना अनिवार्य है। यदि तय समय में ई-वेरिफिकेशन नहीं किया गया, तो रिटर्न अधूरा माना जाएगा। करदाता आधार OTP, नेट बैंकिंग या अन्य उपलब्ध माध्यमों से आसानी से ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते सभी दस्तावेजों की जांच कर सही जानकारी के साथ ITR दाखिल करें। इससे न केवल अनावश्यक परेशानियों और नोटिस से बचा जा सकेगा, बल्कि टैक्स रिफंड भी समय पर प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाएगी।
Druti Jha
National desk, News Darshan




