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सीएम विजय ने किया केंद्र की ‘जी-राम जी’ योजना का खुला विरोध: पीएम मोदी को चिट्ठी लिख जताया कड़ा ऐतराज, कहा- तमिलनाडु पर पड़ेगा ₹5,000 करोड़ का वित्तीय बोझ!

चेन्नई/नई दिल्ली, नेशनल डेस्क : केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय अधिकारों और योजनाओं की हिस्सेदारी को लेकर एक नया और बड़ा कूटनीतिक टकराव सामने आया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. विजय ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित महत्वाकांक्षी ‘जी-राम जी’ योजना (G-RAM-G Scheme) का पुरजोर विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेहद सख्त पत्र लिखा है।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में साफ तौर पर इस योजना के मौजूदा वित्तीय ढांचे पर गंभीर आपत्ति जताई है। सीएम विजय का तर्क है कि यदि यह योजना तमिलनाडु में इसी रूप में लागू की जाती है, तो राज्य सरकार पर सीधे तौर पर ₹5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त और भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा, जो राज्य की पहले से ही दबाव में चल रही वित्तीय स्थिति और बजटीय संतुलन को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख देगा।

मुख्यमंत्री सी. विजय ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में इस बात को कड़ाई से रेखांकित किया है कि ‘जी-राम जी’ योजना के क्रियान्वयन के लिए जो वित्तीय हिस्सेदारी (Funding Pattern) तय की गई है, वह सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसी बड़ी और व्यापक राष्ट्रीय योजनाओं का शत-प्रतिशत खर्च खुद उठाना चाहिए या फिर राज्यों की हिस्सेदारी को न्यूनतम स्तर पर रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार ऐसी योजनाएं ला रही है, जिनका नीतिगत नियंत्रण तो दिल्ली के पास रहता है, लेकिन उनके जमीनी संचालन और भारी-भरकम खर्च का एक बड़ा हिस्सा राज्यों के मत्थे मढ़ दिया जाता है। उन्होंने मांग की है कि जब तक इस योजना के वित्तीय मॉडल में बदलाव नहीं किया जाता और तमिलनाडु को विशेष राहत नहीं मिलती, तब तक राज्य में इसे लागू करना संभव नहीं होगा।

इस बड़े कूटनीतिक विरोध के बाद चेन्नई से लेकर दिल्ली के गलियारों तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तमिलनाडु सरकार के मंत्रियों और सत्ताधारी दल के नेताओं ने मुख्यमंत्री के इस कदम का खुलकर समर्थन करते हुए कहा है कि राज्य के हितों और जनता के टैक्स के पैसे की रक्षा के लिए यह स्टैंड लेना बेहद जरूरी था।

वहीं दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के स्थानीय नेतृत्व ने इस विरोध को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा है कि ‘जी-राम जी’ योजना से तमिलनाडु के बुनियादी ढांचे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचने वाला है, जिसे राज्य सरकार सिर्फ राजनीतिक विरोध के चलते अटका रही है। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) मुख्यमंत्री विजय के इस कड़े पत्र का क्या जवाब देता है और इस ₹5,000 करोड़ के वित्तीय गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या बीच का रास्ता निकाला जाता है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. विजय द्वारा केंद्र की ‘जी-राम जी’ योजना का विरोध करने और राज्य पर ₹5,000 करोड़ का बोझ पड़ने की बात पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि राष्ट्रीय योजनाओं में राज्यों पर ऐसा भारी वित्तीय बोझ डालना जायज है, या केंद्र सरकार को राज्यों की आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और हर एक कड़क व सच्ची खबर को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन (News Darsan) साथ।

Saumya Pal
National Desk News Darshan

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