चेन्नई, नेशनल डेस्क : तमिलनाडु की राजनीति और प्रशासनिक हलकों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री सी. विजय ने राज्य की कमान संभालते ही पूर्ववर्ती द्रमुक (DMK) सरकार के फैसलों पर अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। मुख्यमंत्री विजय ने एक बेहद कड़े और चौंकाने वाले फैसले के तहत पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान मंजूर किए गए करीब ₹245 करोड़ रुपये की लागत वाले 46 कमर्शियल प्रोजेक्ट्स (व्यावसायिक परियोजनाओं) को एक झटके में पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
सरकार के इस औचक और कड़े कदम से राज्य के रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर और विपक्षी खेमे में भारी हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी संकेतों के मुताबिक, इन सभी परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी की गंभीर शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों से मिली इनसाइड स्टोरी के अनुसार, रद्द किए गए इन 46 कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में कई बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, व्यावसायिक भवन और बुनियादी ढांचे से जुड़े निर्माण कार्य शामिल थे, जिन्हें पिछली DMK सरकार के अंतिम महीनों में आनन-फानन में मंजूरी दी गई थी। वर्तमान विजय सरकार का आरोप है कि इन परियोजनाओं के टेंडर आवंटन और जमीनी मंजूरी की प्रक्रियाओं में भारी पारदर्शिता की कमी थी और कई चहेते ठेकेदारों व करीबियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया था।
मुख्यमंत्री सी. विजय ने स्पष्ट किया है कि जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और राज्य में विकास के काम पूरी तरह से पारदर्शी और नियमसंगत तरीके से ही आगे बढ़ेंगे। इन सभी प्रोजेक्ट्स को रद्द करने के साथ ही इनके टेंडर और आवंटन प्रक्रिया की एक उच्च स्तरीय विजिलेंस जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।
इस बड़े फैसले के बाद तमिलनाडु की सियासत पूरी तरह से गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल DMK ने मुख्यमंत्री विजय के इस कदम को पूरी तरह से ‘राजनीतिक द्वेष’ और बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया है। विपक्ष का तर्क है कि ये सभी परियोजनाएं राज्य के आर्थिक विकास और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से जनहित में शुरू की गई थीं, जिन्हें नई सरकार सिर्फ राजनीतिक श्रेय लेने या पिछली सरकार को बदनाम करने के लिए रोक रही है। वहीं दूसरी तरफ, सत्ताधारी दल के नेताओं का कहना है कि यह कोई राजनीतिक बदला नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का हिस्सा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री विजय का यह आक्रामक रुख यह साफ संदेश देता है कि वे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को अपने ढर्रे पर लाने और पिछली सरकार के कथित भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करने के मूड में पूरी तरह तैयार हैं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. विजय द्वारा पूर्ववर्ती DMK सरकार के ₹245 करोड़ के 46 कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को एक झटके में रद्द करने के इस बड़े फैसले को आप किस तरह देखते हैं? क्या आपको लगता है कि यह भ्रष्टाचार पर एक जरूरी प्रहार है, या फिर सरकारों के बदलने पर परियोजनाओं को इस तरह रद्द करने से राज्य के विकास पर असर पड़ता है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। देश की राजनीति, प्रशासनिक फैसलों और हर एक कड़क व सच्ची खबर को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन (News Darsan) साथ।
Saumya Pal
National Desk News Darshan





