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हर्ष फायरिंग मामला: बिहार के भाजपा विधायक राजू सिंह को 4 साल की जेल, ₹25 लाख जुर्माना; विधायकी जाना तय

नई दिल्ली/पटना : दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज सीट से भाजपा (BJP) विधायक राजू कुमार सिंह को चार साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इसके साथ ही उन पर 25 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है, जिसे पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। इस अदालती फैसले के बाद विधायक राजू सिंह की विधानसभा सदस्यता (विधायकी) पर तलवार लटक गई है और उनका अयोग्य घोषित होना लगभग तय माना जा रहा है।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने राजू सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 भाग-II (गैर इरादतन हत्या) के तहत 4 साल की जेल और शस्त्र अधिनियम (Arms Act) की धारा 30 के उल्लंघन के लिए 2 महीने की अतिरिक्त कैद की सजा सुनाई।

“हमें किसी सिंघम या पुष्पा की जरूरत नहीं” — कोर्ट की तल्ख

टिप्पणीफैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने देश में बढ़ते ‘गन कल्चर’ (हर्ष फायरिंग) पर बेहद गंभीर और तल्ख टिप्पणियां कीं। अदालत ने सिनेमाई किरदारों का जिक्र करते हुए कहा, “कानून के शासन द्वारा संचालित राज्य में हमें न तो किसी ‘सिंघम’ की जरूरत है और न ही किसी ‘पुष्पा’ की।”

अदालत ने अपने 97 पन्नों के आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा कि उत्सवों या खुशियों के मौकों पर की जाने वाली हर्ष फायरिंग देश के लिए एक ‘अभिशाप’ बन चुकी है, जिसके कारण अक्सर मासूम लोगों की जान चली जाती है। कोर्ट ने कहा कि जब कानून बनाने वाला (जनप्रतिनिधि) ही कानून तोड़ने लगे, तो समाज में बेहद खतरनाक संदेश जाता है।

क्या था 2018 का पूरा घटनाक्रम ?

यह पूरा मामला 31 दिसंबर 2018 और 1 जनवरी 2019 की मध्यरात्रि का है।

न्यू ईयर पार्टी का आयोजन : दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी (वसंत कुंज क्षेत्र) स्थित एक फार्महाउस में नए साल के स्वागत के लिए एक बड़ी पार्टी का आयोजन किया गया था।

लापरवाह फायरिंग : पार्टी के दौरान शराब के प्रभाव में जोश में आकर विधायक राजू सिंह ने अपनी लाइसेंसी 22 बोर की पिस्तौल से हवा में कई राउंड फायरिंग कर दी।

महिला आर्किटेक्ट की मौत : डांस फ्लोर के पास खड़ीं 45 वर्षीय महिला आर्किटेक्ट (डॉ. अर्चना गुप्ता) के सिर में एक गोली जा लगी। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान 3 जनवरी 2019 को उनकी मृत्यु हो गई।

सबूत मिटाने की कोशिश : पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, घटना के तुरंत बाद डांस फ्लोर से खून साफ करने और सबूतों को नष्ट करने की कोशिश भी की गई थी। हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने राजू सिंह को मुख्य दोषी पाया।

सजा में नरमी के लिए विधायक ने लगाई थी गुहार

सजा के ऐलान से एक दिन पहले (शुक्रवार को) विधायक राजू सिंह ने अदालत के सामने भावुक अपील की थी। उनके वकील ने दलील दी कि उनका किसी की जान लेने का कोई इरादा (Intention) नहीं था और मृतका उनके परिवार के लिए एक ‘भाभी’ की तरह थीं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में उनका सार्वजनिक जीवन बेदाग रहा है, इसलिए उन्हें प्रोबेशन (सुधार का मौका) पर रिहा कर दिया जाए। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इस याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।

कानूनी पेंच: क्यों जाना तय है राजू सिंह की विधायकी ?

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘लिली थॉमस बनाम भारत संघ (2013)’ मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत यदि किसी सांसद या विधायक को किसी भी आपराधिक मामले में 2 वर्ष या उससे अधिक की जेल की सजा सुनाई जाती है, तो उनकी सदन की सदस्यता तुरंत (दोषसिद्धि की तारीख से) समाप्त हो जाती है।

चूंकि राजू सिंह को 4 साल की सजा हुई है, इसलिए बिहार विधानसभा सचिवालय द्वारा उनकी सीट खाली घोषित करने की अधिसूचना जल्द ही जारी की जा सकती है। इसके अलावा, नियम के मुताबिक वे अपनी 4 साल की सजा काटने के बाद अगले 6 वर्षों तक किसी भी प्रकार का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहेंगे।

अब आगे क्या हैं विकल्प ?

ऊपरी अदालत का रुख : विधायक राजू सिंह के पास इस राजनैतिक और कानूनी संकट से उबरने का अब केवल एक ही रास्ता बचा है। वे दिल्ली हाई कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील दायर कर सकते हैं।

दोषसिद्धि पर रोक की जरूरत : यदि उच्च न्यायालय (High Court) उनकी सजा पर रोक लगाने के साथ-साथ उनकी दोषसिद्धि (Conviction) पर भी अंतरिम रोक लगा देता है, तभी उनकी विधायकी बच पाएगी। केवल सजा के निलंबन (Suspension of sentence) से सदस्यता नहीं बचेगी।

साहेबगंज में उपचुनाव की आहट : यदि ऊपरी अदालत से उन्हें तत्काल बड़ी राहत नहीं मिलती है, तो मुजफ्फरपुर की साहेबगंज विधानसभा सीट पर निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव (By-election) कराने की घोषणा की जाएगी।

राजू सिंह के इस अदालती फैसले ने बिहार की सियासत में भी हलचल तेज कर दी है और साहेबगंज में नए राजनैतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

रिया मिश्रा
पॉलिटिकल डेस्क | न्यूज़ दर्शन

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