तेहरान :- ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ रही है। ईरानी प्रशासन और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम में करोड़ों लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया है। विभिन्न रिपोर्टों में यह संख्या अलग-अलग बताई गई है, इसलिए आधिकारिक रूप से किसी एक आंकड़े की पुष्टि नहीं हुई है।
1989 में खुमैनी के जनाजे में क्या हुआ था?
ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के 1989 में हुए अंतिम संस्कार के दौरान अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी थी। श्रद्धांजलि देने की होड़ में हालात इतने बेकाबू हो गए कि उनका ताबूत भीड़ के दबाव में असंतुलित हो गया और कफन फट गया। सुरक्षा बलों को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया रोककर दोबारा व्यवस्था बनानी पड़ी थी। यह घटना आज भी दुनिया के सबसे बड़े और सबसे अव्यवस्थित अंतिम संस्कारों में गिनी जाती है।
खामेनेई की अंतिम यात्रा क्यों है खास?
खामेनेई लगभग चार दशक तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। उनके निधन के बाद देशभर में शोक घोषित किया गया है। तेहरान में निकाली जा रही अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग, विदेशी प्रतिनिधिमंडल और धार्मिक नेता शामिल हो रहे हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और कई स्थानों पर यातायात भी प्रभावित है।
शिया मुसलमानों में मातम का क्या महत्व है?
शिया इस्लाम में शोक (मातम) केवल दुख व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और करबला की शहादत की याद में शिया समुदाय मातमी जुलूस निकालता है और श्रद्धांजलि देता है।
किसी बड़े धार्मिक नेता के निधन पर भी बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई लोग कफन या ताबूत को छूना अपने सम्मान और श्रद्धा की अभिव्यक्ति मानते हैं। इसी कारण कभी-कभी अत्यधिक भीड़ के कारण अव्यवस्था की स्थिति भी बन जाती है।
सुरक्षा पर विशेष ध्यान
1989 में खुमैनी के अंतिम संस्कार में हुई अव्यवस्था को देखते हुए इस बार ईरानी प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। अंतिम यात्रा के दौरान भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
Manvee singh
National desk, News darshan.





