पश्चिम एशिया में ईरान और इज़राइल के बीच तनाव एक बार फिर वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। हाल के दिनों में अमेरिका की ओर से ईरान को दी गई चेतावनियों और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने सुरक्षा स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हालांकि पहले हुए संघर्ष के बाद प्रत्यक्ष सैन्य टकराव में कुछ कमी आई थी, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
ईरान और इज़राइल के बीच लंबे समय से जारी टकराव हाल के वर्षों में कई बार गंभीर सैन्य संघर्ष का रूप ले चुका है। दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों के साथ-साथ साइबर हमले तथा खुफिया अभियानों ने पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता को प्रभावित किया है। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने और सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप लगाते रहे हैं।
हाल के घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसके सैनिकों, सैन्य ठिकानों या सहयोगी देशों के हितों को नुकसान पहुंचाने की कोई भी कोशिश की गई, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। फारस की खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी सैन्य गतिविधियां भी बढ़ाई गई हैं। इसके जवाब में ईरान ने कहा है कि यदि उसके राष्ट्रीय हितों या संप्रभुता पर हमला हुआ तो वह निर्णायक जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल ईरान और इज़राइल के बीच पूर्ण युद्ध की स्थिति नहीं है, लेकिन क्षेत्र में मौजूद ईरान समर्थित संगठनों, लेबनान और सीरिया में बढ़ती गतिविधियों तथा इज़राइल की सुरक्षा कार्रवाई के कारण हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। किसी भी छोटे सैन्य टकराव या उकसावे से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस तनाव का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, इसलिए क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का सीधा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संभावित असर को लेकर कई देशों ने चिंता जताई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह घटनाक्रम आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय देशों और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है। फिलहाल वैश्विक स्तर पर हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के अगले कदम यह तय करेंगे कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा या क्षेत्र एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा।
Aarya Mishra
National Desk, News Darshan




