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देश ने खोया लोककला का अनमोल सितारा: पंडवानी की महान गायिका तीजन बाई का 70 वर्ष की उम्र में निधन

नई दिल्ली/रायपुर | 5 जुलाई, 2026 : देश की लोककला जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। पंडवानी गायन को दुनिया भर में नई पहचान दिलाने वाली महान लोक कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय लोककला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं, कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

छत्तीसगढ़ के गनियारी गाँव में जन्मी तीजन बाई ने बेहद कम उम्र में पंडवानी गायन की शुरुआत की। उस दौर में यह कला मुख्य रूप से पुरुष कलाकारों तक ही सीमित मानी जाती थी, लेकिन सामाजिक विरोध और कई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को कभी नहीं छोड़ा। अपनी दमदार आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति के बल पर उन्होंने पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाई।पंडवानी छत्तीसगढ़ की एक प्राचीन लोककला है, जिसमें महाभारत की कथाओं को संगीत, संवाद और अभिनय के माध्यम से जीवंत किया जाता है। तीजन बाई अपनी प्रभावशाली मंच प्रस्तुति और बिना किसी भव्य साज-सज्जा के विभिन्न पात्रों को जीवंत करने की अद्भुत क्षमता के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने इस लोक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में अमूल्य योगदान दिया।

भारतीय कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया। उन्होंने अनेक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दुनिया को भारतीय लोककला की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय कला और संस्कृति के प्रति तीजन बाई का योगदान सदैव याद रखा जाएगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय मंत्रियों, कलाकारों और सांस्कृतिक जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय लोक परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया।

तीजन बाई की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल उनके सम्मान और पुरस्कार नहीं थे, बल्कि उन्होंने सदियों पुरानी पंडवानी परंपरा को जीवंत बनाए रखा। गाँवों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक उन्होंने अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुँचाया। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और कला के प्रति अटूट प्रेम का प्रेरणादायक उदाहरण रहेगा।

तीजन बाई आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़, उनकी कला और उनकी विरासत हमेशा भारतीय संस्कृति के इतिहास में अमर रहेगी। देश उन्हें एक ऐसी लोक कलाकार के रूप में हमेशा याद रखेगा, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से भारत की सांस्कृतिक पहचान को पूरी दुनिया में गौरवान्वित किया।

Mantasha neyaz

National desk , news darshan

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