प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय इंडो-पैसिफिक दौरे पर हैं। इस दौरान वह “इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड” का दौरा कर रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य इन देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करना है।
दौरे की शुरुआत “इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता” से हुई, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने व्यापार, समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, कनेक्टिविटी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक “प्रम्बनन मंदिर” का भी दौरा किया। यह दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसरों में से एक है और भारत तथा इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का प्रतीक माना जाता है।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी “ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न” पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा, रक्षा आपूर्ति, व्यापार एवं निवेश, महत्वपूर्ण खनिजों और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई अहम समझौते हुए। दोनों नेताओं ने मुक्त, सुरक्षित और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई।
दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी “न्यूजीलैंड के ऑकलैंड” पहुंचे। यह लगभग 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा है। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम के साथ व्यापक वार्ता की। दोनों नेताओं ने प्रस्तावित “मुक्त व्यापार समझौते (FTA)” को आगे बढ़ाने, व्यापार और निवेश बढ़ाने, नवाचार, शिक्षा, कृषि तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क को मजबूत करने पर चर्चा की। इसके साथ ही आतंकवाद-रोधी सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री मोदी का यह छह दिवसीय दौरा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती सक्रियता और वैश्विक भूमिका को दर्शाता है। इस यात्रा के माध्यम से भारत ने कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ खुद को क्षेत्र के एक भरोसेमंद और महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में और मजबूत किया है।
Mantasha neyaz
National desk , news darshan





