Administration Crime

क्या उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण हो रहा है?

मंताशा नियाज़
नेशनल डेस्क, न्यूज़ दर्शन

उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण को लेकर बहस एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। हाल के वर्षों में मेडिकल संस्थानों से जुड़े कुछ मामलों ने जनता, प्रशासन और राजनीतिक हलकों का ध्यान आकर्षित किया है। कुछ मामलों में अवैध धर्मांतरण के आरोप सामने आए हैं, जिनकी जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है।

सबसे चर्चित मामलों में से एक लखनऊ स्थित King George’s Medical University (केजीएमयू) से जुड़ा है। इस मामले में एक रेजिडेंट डॉक्टर ने अपने सहकर्मी चिकित्सक पर आरोप लगाया कि उसने विवाह की शर्त के रूप में धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की, आरोपी डॉक्टर को निलंबित किया गया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इस प्रकरण ने उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य महिला आयोग और चिकित्सा अधिकारियों का भी ध्यान आकर्षित किया।

इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ अन्य आरोपों की जांच के लिए भी कदम उठाए।

Uttar Pradesh Special Task Force (एसटीएफ) को मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्य पेशेवरों से जुड़े कथित संगठित धर्मांतरण गतिविधियों के आरोपों की जांच का जिम्मा सौंपा गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत किसी भी प्रकार के अवैध, जबरन या प्रलोभन देकर कराए गए धर्मांतरण के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने उन दावों की भी जांच की, जिनमें आरोप लगाया गया था कि कुछ मेडिकल अभ्यर्थियों ने अल्पसंख्यक कोटा के तहत प्रवेश प्राप्त करने के लिए धर्म परिवर्तन प्रमाणपत्रों का उपयोग किया। जांच के दौरान अनियमितताएं पाए जाने पर कई अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र रद्द किए गए और यह पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू की गई कि कहीं प्रवेश नियमों का दुरुपयोग तो नहीं हुआ।


इन घटनाओं के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने कॉलेजों को धर्मांतरण संबंधी शिकायतों और जागरूकता के लिए विशेष निगरानी तंत्र या सेल स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं। सरकार का कहना है कि इससे फर्जी दस्तावेजों की पहचान करने और वास्तविक अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के लिए निर्धारित आरक्षण लाभों की पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

हालांकि, वर्तमान में उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि उत्तर प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में व्यापक या व्यवस्थित रूप से धर्मांतरण की गतिविधियां चल रही हैं। विभिन्न मामलों की जांच अभी जारी है। इसलिए फिलहाल इसे पूरे राज्य में स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह जांच, निगरानी, सार्वजनिक बहस और प्रशासनिक पड़ताल का विषय बना हुआ है।
जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

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