वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी (LPG) का बेस प्राइस काफी बढ़ा हुआ है,
जिसकी वजह से एक मानक 14.2 किलोग्राम के घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक इंटरनेशनल मार्केट कॉस्ट ₹1,600 से भी अधिक बैठती है।
इसके बावजूद भारत सरकार भारी वित्तीय बोझ खुद उठाकर आम जनता को बड़ी राहत दे रही है; देश में तेल विपणन कंपनियों द्वारा हाल ही में की गई ₹29 की बढ़ोतरी के बाद सामान्य उपभोक्ताओं के लिए दिल्ली में सिलेंडर की कीमत ₹942 है, जिसमें सरकार लगभग ₹700 की परोक्ष सब्सिडी दे रही है। वहीं, ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के लाभार्थियों को ₹300 की अतिरिक्त डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) सब्सिडी मिलने के कारण उनके लिए सिलेंडर की प्रभावी कीमत सिर्फ ₹642 रह जाती है।
दूसरी ओर, पड़ोसी देशों में वित्तीय घाटे और कमजोर अर्थव्यवस्था के कारण ऐसी भारी सब्सिडी देने का बजट नहीं है, जिसके कारण वहां की जनता को सीधा वैश्विक दरों का सामना करना पड़ रहा है। इस समय भारत के 14.2 किलोग्राम सिलेंडर के मानक और भारतीय रुपए (INR) में तुलना करें, तो पाकिस्तान में घरेलू गैस की कीमतें करीब ₹1,046 बैठती हैं, जहां जनता भारी मुद्रास्फीति और ओपन मार्केट की मनमानी से परेशान है।
पूरी तरह भारतीय तेल निगम पर निर्भर रहने वाले नेपाल में सीमित सब्सिडी और ट्रांसपोर्टेशन टैक्स के कारण यह सिलेंडर लगभग ₹1,207 का मिलता है। इसी तरह, बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुसार हर महीने तय होने वाले दामों के बाद 14.2 किलो के मानक पर यह कीमत लगभग ₹1,225 बैठती है। वहीं, श्रीलंका इस पूरे क्षेत्र में सबसे महंगा साबित हो रहा है, जहां ‘लिट्रो गैस’ जैसी सरकारी कंपनियों द्वारा दरें स्थिर रखने के बावजूद भारतीय मुद्रा और वजन के अनुपात में एक घरेलू सिलेंडर के लिए आम जनता को करीब ₹1,241 तक की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
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Saumya Pal
National desk News Darshan




