बिहार की राजनीति और सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नया विवाद तेजी से तूल पकड़ रहा है, जिसने राज्य के सियासी समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। यह पूरा मामला देश के दो बेहद मशहूर शिक्षकों—’खान सर’ और ‘ज्ञान बिंदु जीएस अकैडमी’ के ‘रौशन सर’—के बीच चल रहे कथित विवाद से जुड़ा है। लेकिन अब इस विवाद की आंच बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव तक पहुंचती दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद के चलते तेजस्वी यादव एक बड़े धर्मसंकट में फंस गए हैं, जहां एक तरफ उनकी पार्टी का पारंपरिक ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण है और दूसरी तरफ सूबे की जमीनी राजनीति।
क्या है पूरा विवाद और क्यों आया तेजस्वी यादव का नाम?
दरअसल, खान सर और रौशन सर दोनों ही बिहार के युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए जाने जाते हैं। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर दोनों के समर्थकों और कोचिंग सेंटरों के बीच अंदरूनी खींचतान की खबरें आ रही थीं। लेकिन बात तब और बढ़ गई जब इस विवाद में जाति और धर्म का एंगल तलाशा जाने लगा। रौशन सर (यादव समाज) और खान सर (मुस्लिम समुदाय) के इस कथित टकराव ने सोशल मीडिया पर एक अलग ही रूप ले लिया। चूंकि आरजेडी (RJD) की पूरी राजनीति मुख्य रूप से इसी ‘MY’ यानी मुस्लिम और यादव समीकरण के मजबूत गठबंधन पर टिकी हुई है, इसलिए दोनों समुदायों के बीच सोशल मीडिया पर बढ़ती इस कड़वाहट ने तेजस्वी यादव के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
एक तरफ ‘MY’ समीकरण और दूसरी तरफ राजनीति का धर्मसंकट
तेजस्वी यादव के लिए यह स्थिति किसी दोधारी तलवार पर चलने जैसी है, जिसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
1.पारंपरिक वोट बैंक का बिखरने का डर: आरजेडी के लिए मुस्लिम और यादव दोनों ही रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। सोशल मीडिया पर दोनों शिक्षकों के फैंस जिस तरह आपस में भिड़ रहे हैं, उससे इस बात का खतरा बढ़ गया है कि यह जमीनी स्तर पर दोनों समुदायों के बीच किसी तरह की दूरी न पैदा कर दे। अगर तेजस्वी यादव किसी एक का पक्ष लेते हैं, तो दूसरे पक्ष के नाराज होने का खतरा रहता है।
2.चुनावी राजनीति और युवाओं का रुख: बिहार में युवा वोटर एक बहुत बड़ी ताकत हैं और खान सर व रौशन सर दोनों की ही युवाओं पर जबरदस्त पकड़ है। तेजस्वी यादव खुद को युवाओं के नेता के रूप में पेश करते हैं और रोजगार के मुद्दे पर राजनीति करते हैं। ऐसे में युवाओं के बीच चहेते दो बड़े चेहरों के विवाद पर कोई भी जल्दबाजी में लिया गया फैसला या बयान उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। यही वजह है कि इस पूरे संवेदनशील मुद्दे पर आरजेडी नेतृत्व बेहद संभलकर कदम बढ़ा रहा है और सीधे तौर पर कुछ भी बोलने से बच रहा है।
क्या पड़ेगा इसका राजनीतिक असर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी विवाद को राजनीतिक रंग लेने में वक्त नहीं लगता। हालांकि यह मूल रूप से कोचिंग जगत और दो शिक्षकों के बीच का आंतरिक या व्यावसायिक मामला हो सकता है, लेकिन बिहार की जातिप्रधान राजनीति में इसे वोट बैंक से जोड़कर देखा जाने लगा है। अगर यह विवाद जल्द ही शांत नहीं हुआ, तो आने वाले समय में विपक्ष को आरजेडी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने का एक नया मौका मिल सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी इस अंदरूनी सोशल मीडिया वॉर को शांत करने और अपने ‘MY’ समीकरण को एकजुट रखने के लिए पर्दे के पीछे से क्या रणनीति अपनाती है।
खान सर और रौशन सर के इस कथित विवाद को राजनीतिक रंग दिए जाने और तेजस्वी यादव के ‘MY’ समीकरण पर इसके असर को आप किस तरह देखते हैं? क्या आपको लगता है कि इस तरह के विवादों से बिहार की राजनीति प्रभावित होनी चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। बिहार की राजनीति और हर एक कड़क और सच्ची खबर का सटीक विश्लेषण देखने के लिए जुड़े रहिए News Darshan साथ।
आदित्य ठाकुर
बिहार ब्यूरो, न्यूज़ दर्शन (News Darshan)





