Administration Business International Politics

भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के ब्रिटेन दौरे से भारत को क्या होगा फायदा?

नई दिल्ली : भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक साझेदारी एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। “भारत–ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA)” लागू होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री “पीयूष गोयल” 25 से 27 जून तक तीन दिवसीय ब्रिटेन दौरे पर हैं। इस दौरान वे ब्रिटिश मंत्रियों, वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर समझौते के सुचारु क्रियान्वयन और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा कर रहे हैं।

मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो देशों के बीच ऐसा समझौता होता है, जिसके तहत आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क (टैरिफ) और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त किया जाता है। इससे दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार आसान और कम लागत वाला हो जाता है। भारत–ब्रिटेन CETA को भारत के सबसे व्यापक व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, निवेश, डिजिटल व्यापार, नवाचार, सीमा शुल्क सहयोग और पेशेवरों की आवाजाही जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।

दोनों देशों ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि “CETA” और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) 15 जुलाई 2026. से लागू होंगे। इस समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य सीमा शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिलेगा। इससे वस्त्र, रेडीमेड परिधान, चमड़ा, दवा उद्योग, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, समुद्री और कृषि उत्पादों के निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

यह समझौता सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए भी नए अवसर लेकर आएगा। कम निर्यात लागत और बेहतर बाजार पहुंच से भारतीय MSME वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। साथ ही निर्यात और विनिर्माण गतिविधियों में वृद्धि से वस्त्र, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) है, जिसके तहत ब्रिटेन में अस्थायी रूप से कार्यरत पात्र भारतीय पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) में मिलने वाली छूट की अवधि “तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष” कर दी गई है। इससे आईटी, वित्त, इंजीनियरिंग, कंसल्टिंग और शिक्षा जैसे क्षेत्रों के भारतीय पेशेवरों को सीधा लाभ मिलेगा।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यह भी घोषणा की कि सरकार देशभर में 1,000 सलाहकारों (Advisors) की नियुक्ति करेगी और व्यापार सहायता पोर्टल को और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि निर्यातक और MSME इस समझौते का अधिकतम लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि भारत–ब्रिटेन साझेदारी अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों तक भी विस्तारित हो रही है।

भारतीय उपभोक्ताओं को भी इस समझौते का लाभ मिल सकता है। शुल्क में कमी के कारण ब्रिटेन से आयात होने वाले कुछ उत्पाद—जैसे प्रीमियम स्पिरिट्स, चुनिंदा वाहन, औद्योगिक मशीनरी और चिकित्सा उपकरण—पहले की तुलना में अधिक किफायती हो सकते हैं, जबकि भारत ने संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की है।

हालांकि, भारतीय निर्यातकों को इस समझौते का पूरा लाभ उठाने के लिए ब्रिटेन के सख्त गुणवत्ता मानकों, पर्यावरणीय नियमों और तकनीकी आवश्यकताओं का पालन करना होगा।

कुल मिलाकर, भारत–ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क , पेशेवरों के लिए बेहतर अवसर, बढ़ते निवेश और सरकार की सहायता योजनाओं के साथ यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति को और मजबूत करने तथा ब्रिटेन के साथ दीर्घकालिक आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है।

— मंताशा नेयाज़
नेशनल डेस्क, न्यूज़ दर्शन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *