अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर से जुड़ा दान विवाद अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बनता जा रहा है। मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
मामले की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दान पेटियों से निकली नकदी की गिनती, CCTV निगरानी और बैंक में जमा प्रक्रिया में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई है। जांच एजेंसियों ने अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जो दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े थे।
सूत्रों के अनुसार, करोड़ों रुपये के चढ़ावे में हेरफेर की आशंका जताई जा रही है। हालांकि सटीक राशि का आधिकारिक खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि क्या यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।
इस पूरे विवाद के बीच Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust ने साफ किया है कि सभी दान सुरक्षित हैं और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। वहीं ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरों ने विवाद को और हवा दे दी है।
राजनीतिक मोर्चे पर भी यह मुद्दा गर्मा गया है। समाजवादी पार्टी के नेता Akhilesh Yadav ने यूपी सरकार और मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष लगातार इस मामले में पारदर्शिता और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है।
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, ऐसे में दान राशि को लेकर उठे ये सवाल लोगों की भावनाओं से भी सीधे जुड़े हैं। अब सबकी नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
क्या यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही है या फिर कोई बड़ा घोटाला? इस सवाल का जवाब आने वाले दिनों में साफ हो सकता है। फिलहाल अयोध्या का यह दान विवाद देश की राजनीति और धार्मिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन चुका है।
Manvee singh
National desk, News darshan.



