तेहरान/नई दिल्ली, इंटरनेशनल ब्यूरो : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) से इस वक्त की सबसे बड़ी और दिल दहला देने वाली ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। ईरान की राजधानी तेहरान के मशहूर आज़ादी स्क्वायर (Azadi Square) पर जहां तक नज़र जा रही है, वहां तक सिर्फ और सिर्फ इंसानों का समंदर दिखाई दे रहा है। यह कोई आम राजनीतिक रैली नहीं है, बल्कि यह ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार की अंतिम विदाई (Funeral Prayers) का महा-आयोजन है.
खुफिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा कार्यक्रम पूरे 6 दिनों तक चलने वाला है, जिसकी शुरुआत हो चुकी है। इस 6 दिवसीय महा-आयोजन में पूरे ईरान और उसके आसपास के इलाकों से कुल मिलाकर लगभग 3 करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया है। तेहरान की सबसे बड़ी मस्जिद के बाहर जुटे लाखों लोग अपने हाथों में लाल झंडे लिए हुए हैं और वहां लगातार “अमेरिका मुर्दाबाद” और “इजरायल मुर्दाबाद” के नारे गूंज रहे हैं. इतनी भारी तादाद में लोगों का सड़कों पर उतरना पूरी दुनिया के कूटनीतिज्ञों को हैरान कर रहा है।
आखिर क्यों उबल रहा है ईरान? (घटना की मुख्य वजह)
इस पूरे महा-संकट की सबसे बड़ी वजह है ईरान के सबसे ताकतवर नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत. दरअसल, बीती 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के भीतर उनके मुख्य ठिकाने (कंपाउंड) पर एक बड़ा हवाई हमला किया था. इस खुफिया और अचानक किए गए हमले में न सिर्फ सर्वोच्च नेता खामेनेई, बल्कि उनके परिवार के चार अन्य सदस्य भी मारे गए. ईरान के इतिहास में यह पहली बार है जब उनके सबसे बड़े धार्मिक और सैन्य प्रमुख को किसी बाहरी देश ने सीधे उनके घर में घुसकर निशाना बनाया है, जिसकी वजह से पूरे देश में गम और भारी गुस्सा है.
सड़कों पर लाल झंडे और इतनी भीड़ का असली मकसद क्या है?
तेहरान की सड़कों पर जो करोड़ों लोग जुटे हैं, वे सिर्फ शोक मनाने नहीं आए हैं, बल्कि इसके पीछे दो बड़े रणनीतिक मकसद हैं:
- दुनिया को ताकत दिखाना: ईरान इस महा-शक्ति प्रदर्शन के जरिए सीधे अमेरिका और इजरायल को यह संदेश दे रहा है कि उसका सबसे बड़ा नेता भले ही मारा गया हो, लेकिन देश की जनता और वहां की सेना टूटी नहीं है।
- बदले का संकल्प (लाल झंडे): इस जनाजे में लोग बड़े पैमाने पर लाल झंडे लेकर चल रहे हैं. शिया संस्कृति में लाल झंडे का मतलब होता है “अधूरा बदला”. लोग सड़कों पर चिल्लाकर कह रहे हैं कि जब तक वे अपने नेता की मौत का बदला नहीं ले लेते, वे शांत नहीं बैठेंगे.
ट्रंप की ‘वन शॉट’ धमकी और ईरान का करारा पलटवार
इस नाजुक और संवेदनशील मौके पर वैश्विक राजनीति का पारा तब और चढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और विवादित दावा कर दिया. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास इतनी ताकत है कि वह ईरान के बचे हुए पूरे नेतृत्व को ‘एक ही झटके में’ (All in one shot) खत्म कर सकता है, जब वे वहां शोक मनाने इकट्ठा हुए हैं. हालांकि, ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि अंतिम संस्कार की इस कार्यवाही के दौरान कोई भी पक्ष एक-दूसरे पर हमला नहीं करेगा.
ट्रंप की इस सीधी धमकी पर भड़के ईरान ने भी बेहद कड़ा रुख अपनाया और “नो हिस्ट्री” (तुम्हारा कोई इतिहास नहीं है) कहते हुए अमेरिकी धमकी पर करारा पलटवार किया है. ईरान ने साफ कर दिया कि अमेरिका
की चंद सौ साल पुरानी सभ्यता ईरान के हजारों साल पुराने इतिहास और उसके हौसले को नहीं डरा सकती.
दूसरी तरफ, जमीनी मोर्चे पर हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं. इजरायल के सैन्य प्रमुख ने दक्षिणी लेबनान में अपनी सेना को संबोधित करते हुए साफ चेतावनी दी है कि अगर हिजबुल्लाह ने सीजफायर (युद्धविराम) का उल्लंघन किया, तो इजरायल तुरंत एक बहुत बड़ा और तेज हमला कर देगा. ईरान इस समय अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और वह इस महा-जनाजे के जरिए अपने देश के लोगों को एकजुट रख रहा है ताकि आने वाले दिनों में अगर सीधा युद्ध शुरू हो, तो देश का बच्चा-बच्चा तैयार रहे.
तेहरान के आज़ादी स्क्वायर पर 6 दिनों तक चलने वाले इस महा-आयोजन, 3 करोड़ की भीड़ और अमेरिका-इजरायल के साथ बढ़ते इस भयंकर तनाव को आप किस तरह देखते हैं? क्या आपको लगता है कि यह संकट किसी बड़े विश्व युद्ध का रूप ले सकता है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। दुनिया की राजनीति, इंटरनेशनल अफेयर्स और हर एक कड़क व सच्ची रिपोर्ट को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज दर्शन News Darshan के साथ।
Saumya Pal
National Desk News Darshan





