नई दिल्ली, नेशनल क्राइम ब्यूरो : दिल्ली की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल में बंद एक अमेरिकी मर्सिनरी (भाड़े के सैनिक) मैथ्यू एरॉन वैनडाइक (Matthew Aaron VanDyke) ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। लेकिन कोर्ट जाने की वजह कोई कानूनी राहत या जमानत नहीं, बल्कि जेल का खाना है। मैथ्यू ने अदालत से गुहार लगाई है कि तिहाड़ जेल में मिलने वाला ‘तीखा और तेलीय’ (Spicy and Oily) खाना उसके पेट को बिल्कुल हजम नहीं हो रहा है, जिससे उसकी सेहत बिगड़ रही है। इसलिए उसे जेल के अंदर खुद अपने लिए ‘चिकन, पास्ता और ऑलिव ऑयल’ (जैतून का तेल) का इस्तेमाल करके खाना बनाने की इजाजत दी जाए। इस अजीबोगरीब मांग के बाद कोर्ट से लेकर जेल प्रशासन तक सब हैरान हैं।
कौन है मैथ्यू एरॉन वैनडाइक?
(जानिए इसका खतरनाक बैकग्राउंड)
मैथ्यू कोई आम विदेशी कैदी नहीं है, बल्कि उसका बैकग्राउंड बेहद हैरान करने वाला है। मैथ्यू वैनडाइक एक अमेरिकी डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर और मर्सिनरी (भाड़े का सैनिक) रहा है। वह साल 2011 में लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया था, जब उसने वहां के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ लड़ने वाले विद्रोहियों का साथ दिया था। इस दौरान उसे लीबियाई सेना ने पकड़ लिया था और उसने करीब 6 महीने जेल में भी काटे थे। इसके बाद वह इराक में भी आईएसआईएस (ISIS) के खिलाफ लड़ने वाले स्थानीय लड़ाकों को ट्रेनिंग देने और उनके साथ मिलकर सैन्य अभियानों का हिस्सा बनने के लिए जाना गया। भारत में किसी अवैध या संदिग्ध गतिविधि के चलते वह इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
क्या कहता है जेल का नियम और कोर्ट का रुख?
मैथ्यू ने अपनी अर्जी में कहा है कि वह बचपन से ही पश्चिमी (Western) खाना खाने का आदी है और भारतीय जेल का मसालेदार खाना उसकी पाचन क्रिया (Digestion) को खराब कर रहा है। वह पैसे देकर जेल के भीतर ही चिकन, पास्ता, सलाद और ऑलिव ऑयल जैसी चीजें मंगवाने और उन्हें पकाने की छूट चाहता है।
हालांकि, तिहाड़ जेल के नियमों (Jail Manual) के मुताबिक किसी भी कैदी को जेल के अंदर खुद का अलग खाना बनाने या बाहर से खास सामग्री मंगवाने की इजाजत नहीं होती है। सभी कैदियों को एक जैसा ही खाना दिया जाता है, जो डॉक्टरों की देखरेख में तय होता है। अगर कोई कैदी बीमार होता है, तो जेल के डॉक्टर की सलाह पर ही उसे सादा या उबला हुआ खाना दिया जा सकता है। अब कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या एक अंतरराष्ट्रीय कैदी की सेहत के आधार पर नियमों में ढील दी जा सकती है या नहीं।
तिहाड़ जेल में बंद इस अमेरिकी लड़ाके की ‘चिकन-पास्ता’ और ऑलिव ऑयल की इस मांग पर आपकी क्या राय है? क्या जेल प्रशासन को विदेशी कैदियों की सेहत के लिए उनके देश जैसा खाना बनाने की छूट देनी चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। देश-दुनिया की अनोखी खबरों, क्राइम अपडेट्स और कड़क व सच्ची रिपोर्ट को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन News Darshan के साथ।
Saumya Pal
National Desk News Darshan





