फ्रांस के एवियन शहर में चल रहा 52वां G7 शिखर सम्मेलन इस समय वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। इस समिट में न केवल दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के नेता जुटे हैं, बल्कि पर्दे के पीछे कई ऐसे बड़े घटनाक्रम चल रहे हैं जो आने वाले समय में वैश्विक शांति और व्यापार की दिशा तय करेंगे। इस समिट के दौरान जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात में युद्ध और सुरक्षा पर गंभीर चर्चा हुई, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक अस्थाई शांति समझौते (Memorandum of Understanding – MOU) पर हुई चर्चा इस समिट का मुख्य आकर्षण बन गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या बात हुई? जानिए इस समझौते के मुख्य बिंदु
इस समिट के इतर सबसे बड़ी खबर अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस नए घटनाक्रम को लेकर आई है। कूटनीतिक सूत्रों और सामने आए तथ्यों के अनुसार, दोनों देशों के बीच इन मुख्य बिंदुओं पर सीधी बात हुई है:
- शांति समझौते की रूपरेखा (MOU): अमेरिका और ईरान के बीच शांति बहाल करने के लिए एक प्रारंभिक समझौते (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत ईरान को कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जाएगी, लेकिन इसके बदले में ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सभी शर्तों और दायित्वों को पूरा करना होगा।
- परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रोक: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने साफ शब्दों में स्पष्ट किया है कि इस समझौते का सबसे बड़ा और मुख्य आधार यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल या विकसित न कर सके।
- G7 देशों का समर्थन: राष्ट्रपति ट्रंप की इस बड़ी पहल को G7 के अन्य सदस्य देशों का भी पूरा समर्थन मिला है। सभी वैश्विक नेताओं ने एक व्यापक समझौते की वकालत की है ताकि मध्य पूर्व (Middle East) के क्षेत्र में हमेशा के लिए शांति और स्थिरता बनी रहे।
- लेबनान और इज़राइल विवाद की चुनौती: इस शांति समझौते के रास्ते में कुछ बड़ी चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। ईरान ने मांग रखी है कि इस युद्ध को पूरी तरह खत्म करने के लिए इज़राइल को लेबनान के क्षेत्रों से अपनी सेना पीछे हटानी होगी, लेकिन इज़राइल ने ईरान की इस मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया है।
पीएम मोदी और ट्रंप की द्विपक्षीय मुलाकात: वैश्विक सुरक्षा पर चर्चा
इस समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई औपचारिक द्विपक्षीय (Bilateral) बैठक में भी वैश्विक युद्ध और सुरक्षा का मुद्दा सबसे ऊपर रहा। दोनों नेताओं ने मौजूदा वैश्विक संघर्षों, विशेषकर रूस-यूक्रेन संकट और मध्य पूर्व में जारी तनाव पर विस्तार से बात की। पीएम मोदी ने एक बार फिर भारत के पुराने स्टैंड को दोहराया कि “यह युग युद्ध का नहीं है” और किसी भी विवाद का हल केवल कूटनीति और बातचीत के जरिए ही निकाला जाना चाहिए। इसके साथ ही, ट्रंप और मोदी की इस बातचीत में लाल सागर के सुरक्षा संकट पर भी चर्चा हुई, जो भारत के व्यापारिक जहाजों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। हाल ही में हुए हमलों और तनाव को देखते हुए भारत ने इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही।
दुनिया और भारत पर क्या पड़ेगा इसका असर?
इन तमाम चर्चाओं और बड़े समझौतों का वैश्विक स्तर पर और भारत पर बहुत बड़ा असर देखने को मिलेगा। सबसे पहली बात तो यह कि अगर अमेरिका-ईरान के इस समझौते से मध्य पूर्व और खाड़ी देशों का तनाव कम होता है, तो समुद्री व्यापारिक मार्ग सुरक्षित हो जाएंगे। इससे भारत का यूरोप और अमेरिका के साथ होने वाला एक्सपोर्ट-इंपोर्ट तेज और सस्ता होगा। दूसरी बात, ईरान के साथ रिश्ते सुधरने से वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता आएगी। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतें घटने या स्थिर रहने से देश में महंगाई पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, ट्रंप के साथ युद्ध से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करके पीएम मोदी ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक शांति की किसी भी कोशिश में भारत की भूमिका बेहद अहम है।
G7 समिट के बीच अमेरिका-ईरान के इस ऐतिहासिक शांति समझौते (MOU) और पीएम मोदी-ट्रंप की मुलाकात में युद्ध पर हुए इस महामंथन को आप किस तरह देखते हैं? क्या आपको लगता है कि इससे दुनिया में चल रहे युद्ध हमेशा के लिए खत्म होंगे? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। दुनिया की कूटनीति और कड़क राजनीतिक खबरों को सबसे पहले आसान भाषा में देखने के लिए जुड़े रहिए नेशनल डेस्क, न्यूज़ दर्शन (News Darshan) साथ।
Saumya Pal
National Desk News Darshan





