मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच पाकिस्तान एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिशों में जुटा दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के साथ बढ़ते संपर्क और क्षेत्रीय कूटनीति में अपनी सक्रियता को पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे पर राजनीतिक लाभ में बदलना चाहता है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गतिविधियों के कारण चर्चा में रहे हैं। पाकिस्तान की कोशिश है कि क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी भूमिका को मजबूत दिखाकर वैश्विक मंच पर अपनी प्रासंगिकता बढ़ाई जाए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिलाने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में किसी भी कूटनीतिक उपलब्धि या नए संबंध को वह अपने पुराने एजेंडे से जोड़कर पेश करने का प्रयास कर सकता है।
हालांकि ईरान और भारत के बीच भी मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। चाबहार पोर्ट, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बना हुआ है। इसलिए ईरान का पूरी तरह किसी एक पक्ष के साथ खड़ा होना आसान नहीं माना जा रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान इस समय आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे को प्रमुखता देकर घरेलू राजनीति में समर्थन जुटाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है।
भारत लगातार दोहराता रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और यह पूरी तरह आंतरिक मामला है। भारत का कहना है कि इस विषय पर किसी तीसरे पक्ष की भूमिका की कोई आवश्यकता नहीं है।
क्षेत्रीय कूटनीति, बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरण और कश्मीर का मुद्दा—इन सबके बीच पाकिस्तान की रणनीति पर नजर बनी हुई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कूटनीतिक प्रयास कितने प्रभावी साबित होते हैं और उनका क्षेत्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
रिपोर्टर: तान्या भारती, न्यूज़ दर्शन | विदेश डेस्क



