मेहनत और मजबूत इरादों के दम पर सफलता हासिल करने की एक बेहद भावुक और गर्व से भर देने वाली कहानी बिहार के भोजपुर (आरा) जिले से सामने आई है। आरा के रहने वाले गोवर्धन कुमार ने तमाम अभावों, आर्थिक तंगहाली और मुश्किलों के बीच भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर इतिहास रच दिया है। सेना की पासिंग आउट परेड के बाद जब गोवर्धन सैन्य अफसर की वर्दी पहनकर मैदान में खड़े हुए, तो उनके माता-पिता ने बेहद गर्व और नम आंखों के साथ उनके कंधों पर लेफ्टिनेंट के चमचमाते हुए सितारे (स्टार्स) लगाए। यह पल उस पूरे परिवार के लिए बरसों की तपस्या के सफल होने जैसा था।
दिन में काम और रात में पढ़ाई का कड़ा संघर्ष
गोवर्धन कुमार का यह सफर आम युवाओं की तरह सुख-सुविधाओं से भरा नहीं था। उनका परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर था, जिसकी वजह से घर चलाने के लिए हर एक सदस्य को संघर्ष करना पड़ता था। गोवर्धन ने कभी अपनी इस गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वे दिन के समय अपने पिता के साथ काम पर जाते थे और उनके काम में पूरी तरह हाथ बंटाते थे ताकि परिवार को थोड़ी आर्थिक मदद मिल सके। दिनभर धूप और धूल में कड़ी शारीरिक मेहनत करने के बाद जब शरीर पूरी तरह थक जाता था, तब भी गोवर्धन अपनी किताबों से दूर नहीं होते थे। वे रात के सन्नाटे में चिराग या ढिबरी की रोशनी में घंटों जागकर सेना की परीक्षा की तैयारी करते थे। दिन में काम और रात में पढ़ाई के इस बेहद कड़े और थका देने वाले रूटीन को उन्होंने सालों तक बिना रुके जिया।
लगन के दम पर पूरा किया सेना में अफसर बनने का सपना
गोवर्धन का बचपन से ही सिर्फ एक ही सपना था—भारतीय सेना में एक उच्च अधिकारी बनकर देश की सेवा करना। अपनी इसी अटूट लगन और एकाग्रता के दम पर उन्होंने सेना की कड़क लिखित परीक्षा को पास किया और उसके बाद सबसे कठिन माने जाने वाले एसएसबी (SSB) इंटरव्यू में भी सफलता हासिल की। इसके बाद उन्हें सेना की अकैडमी में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया, जहां की सख्त और बेहद अनुशासित ट्रेनिंग को उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा किया। आज वे आधिकारिक रूप से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन चुके हैं। गोवर्धन की यह सफलता देश के उन लाखों युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी सीख है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो गरीबी और विपरीत परिस्थितियां भी आपका रास्ता नहीं रोक सकतीं।
बिहार के आरा के रहने वाले इस जांबाज युवा गोवर्धन कुमार के इस बेमिसाल संघर्ष और ऐतिहासिक कामयाबी पर आपकी क्या राय है? नीचे कमेंट बॉक्स में इस नए सैन्य अधिकारी के लिए अपनी शुभकामनाएं और विचार हमारे साथ जरूर साझा करें। देश के कोने-कोने से आने वाली ऐसी ही हर एक कड़क, सच्ची और प्रेरित करने वाली खबर को देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन (News Darsan)साथ।
Saumya Pal
National desk News Darshan



