पटना स्थित प्रतिष्ठित 10 सर्कुलर रोड बंगले को लेकर राजनीतिक और भावनात्मक बहस तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव से जुड़ा यह सरकारी आवास लगभग दो दशकों से उनकी पहचान का हिस्सा रहा है। अब बिहार सरकार द्वारा बंगला खाली कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद राबड़ी देवी ने अतिरिक्त समय की मांग की है। परिवार का कहना है कि लालू प्रसाद यादव की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनके कमरे को विशेष रूप से एक आईसीयू जैसी सुविधाओं से लैस किया गया है। आखिर क्या है इस पूरे विवाद की वजह, आइए देखते हैं हमारी यह विशेष रिपोर्ट।
पटना के 10 सर्कुलर रोड का राजनीतिक महत्व इसकी दीवारों से कहीं अधिक है। पिछले करीब 20 वर्षों से यह बंगला बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का आधिकारिक आवास रहा है। लेकिन अब यह स्थान यादव परिवार और बिहार सरकार के बीच विवाद का केंद्र बन गया है।
बिहार सरकार की ओर से बंगला खाली करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि राबड़ी देवी का कहना है कि अचानक स्थान परिवर्तन से लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। परिवार का दावा है कि मौजूदा परिस्थितियों में उनका स्थानांतरण जोखिम भरा हो सकता है।
लालू प्रसाद यादव पिछले कई वर्षों से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। पार्टी नेताओं के अनुसार, 10 सर्कुलर रोड स्थित उनके कमरे को विशेष चिकित्सा उपकरणों और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, ताकि आपात स्थिति में उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
परिवार का कहना है कि मौजूदा आवास में पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी सभी जरूरी व्यवस्थाएं मौजूद हैं और ऐसी स्थिति में किसी अन्य स्थान पर जाना आसान नहीं है।
राबड़ी देवी लगातार बिहार सरकार से अपील कर रही हैं कि जब तक वैकल्पिक आवास और वहां आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था पूरी नहीं हो जाती, तब तक परिवार को कुछ और समय के लिए 10 सर्कुलर रोड में रहने की अनुमति दी जाए।
उनका कहना है कि यह केवल आवास का मुद्दा नहीं है, बल्कि लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य और उनकी निरंतर देखभाल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है।
इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। राष्ट्रीय जनता दल का आरोप है कि बंगला खाली कराने की प्रक्रिया लालू प्रसाद यादव की स्वास्थ्य स्थिति के प्रति असंवेदनशील है।
वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं का कहना है कि सरकारी आवास निर्धारित नियमों के तहत आवंटित किए जाते हैं और अधिकार समाप्त होने के बाद उन्हें अनिश्चितकाल तक अपने कब्जे में नहीं रखा जा सकता।
यह विवाद केवल एक सरकारी बंगले तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक से लोगों के भावनात्मक जुड़ाव को भी दर्शाता है।
फिलहाल, 10 सर्कुलर रोड का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। हालांकि, यह बंगला यादव परिवार की राजनीतिक विरासत और बिहार के राजनीतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का प्रतीक माना जाता है।
अब सभी की नजरें बिहार सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। क्या सरकार परिवार की अपील पर विचार करेगी या नियमों के अनुसार बंगला खाली कराया जाएगा?
फिलहाल के लिए इतना ही। ताजा अपडेट्स के लिए बने रहिए हमारे साथ।
नंदिनी चौहान, नेशनल डेस्क, न्यूज़ दर्शन।



