अमेरिका के बोस्टन स्थित एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए विवादित 1 लाख डॉलर के H-1B वीज़ा शुल्क को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह शुल्क वृद्धि एक अनधिकृत और गैरकानूनी कर के समान है। इस फैसले से कुशल विदेशी पेशेवरों और उन टेक कंपनियों को बड़ी राहत मिली है जो इन वीज़ा धारकों पर निर्भर हैं।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता था, चीन के साथ प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर सकता था और उच्च कौशल वाले पेशेवरों को दूसरे देशों की ओर आकर्षित कर सकता था।
H-1B वीज़ा कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और वित्त जैसे विशेष क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। H-1B वीज़ा धारकों में बड़ी संख्या भारतीय पेशेवरों की है, जो अमेरिका में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
अदालत ने कहा है कि प्रशासन के पास इस प्रकार शुल्क वृद्धि लागू करने का अधिकार नहीं था, इसलिए बढ़ाए गए शुल्कों को अमान्य घोषित किया जाता है।
हालांकि यह फैसला आवेदकों और भर्ती करने वाली कंपनियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, लेकिन यह केवल शुरुआती जीत है। कानूनी लड़ाई अभी जारी है और सोशल मीडिया की अतिरिक्त जांच जैसे अन्य सुधारात्मक कदम अभी भी प्रभावी हैं। अधिक अपडेट्स के लिए बने रहिए हमारे साथ।
नंदिनी चौहान, नेशनल डेस्क, न्यूज़ दर्शन।




