नई दिल्ली :- मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर सोमवार को वैश्विक वित्तीय बाजारों पर साफ देखने को मिला। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में करीब 3% से 4% तक की तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। इसका असर भारतीय शेयर बाजार समेत दुनिया के कई प्रमुख बाजारों पर पड़ा, जहां कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई।
ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ने और ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका को बढ़ा दिया है।
भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले। शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, ऑटो, मेटल और वित्तीय शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे महंगाई और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि, यदि ब्रेंट क्रूड 80–90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहता है, तो बाजार पर असर सीमित रह सकता है।
वैश्विक बाजारों में भी निवेशकों की नजर मध्य पूर्व की स्थिति, तेल आपूर्ति और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
Manvee singh
National desk, News darshan.





