वाशिंगटन/नई दिल्ली, साइंस एंड स्पेस ब्यूरो : विज्ञान की दुनिया में इंसानों ने एक और ऐसा कदम बढ़ा दिया है जो अब तक सिर्फ साइंस-फिक्शन फिल्मों में ही देखने को मिलता था। अमेरिकी रेगुलेटर फेडरल कम्युनिकेशंस कमिशन (FCC) ने अंतरिक्ष में एक विशालकाय शीशा (Giant Mirror) लॉन्च करने वाले बेहद महत्वाकांक्षी ‘Earendil-1’ (एरेंडिल-1) मिशन को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दे दी है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष से रात के समय पृथ्वी के खास और विशिष्ट हिस्सों पर सीधे सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट (परावर्तित) करना है। यानी इस तकनीक के कामयाब होने के बाद धरती के चुनिंदा इलाकों में रात के वक्त भी अंधेरा नहीं होगा और वहां सूरज की रोशनी बिखेरी जा सकेगी। हालांकि, इस फैसले के बाद दुनिया भर के खगोलविदों (Astronomers) और वैज्ञानिकों ने इस पर गहरी चिंता जताई है।
क्या है ‘Earendil-1’ मिशन और यह कैसे काम करेगा? (The Technology)
- अंतरिक्ष में महा-शीशा: इस मिशन के तहत अंतरिक्ष की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में बेहद पतले और अत्यधिक परावर्तक (Highly Reflective) मैटेरियल से बने विशालकाय शीशों को स्थापित किया जाएगा।
- रात में चमकेगी रोशनी: जब पृथ्वी के किसी हिस्से में रात होगी, तब यह शीशा अंतरिक्ष में इस तरह से एलाइन (एडजस्ट) होगा कि वह सूर्य की किरणों को समेटकर सीधे धरती के उस विशिष्ट हिस्से पर बाउंस (रिफ्लेक्ट) कर देगा।
- फायदा क्या होगा? इस तकनीक का इस्तेमाल आपदा प्रबंधन (Disaster Management) के समय बचाव कार्यों को रात में आसान बनाने, कृषि क्षेत्रों में फसलों की पैदावार बढ़ाने या बड़े शहरों में स्ट्रीट लाइट्स की बिजली बचाने के लिए किया जा सकता है।
वैज्ञानिकों और खगोलविदों को क्यों सता रहा है डर? (The Big Concerns)
इस मिशन को मंजूरी मिलने के बाद से ही दुनिया भर के स्पेस साइंटिस्ट और स्टार-गेजर्स (आसमान देखने वाले) काफी परेशान हैं। उनकी चिंताओं के पीछे मुख्य वजहें ये हैं:
- आसमान की प्राकृतिक चमक का खत्म होना: वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरिक्ष में इतने बड़े शीशे के आने से रात के समय आसमान की प्राकृतिक चमक (Light Pollution) बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी, जिससे रात का स्वाभाविक अंधेरा प्रभावित होगा।
- स्टार-गेजिंग और रिसर्च में बाधा: ब्रह्मांड की गहराइयों और दूर की आकाशगंगाओं का अध्ययन करने वाले खगोलविदों का मानना है कि इस कृत्रिम रोशनी के कारण टेलिस्कोप से अंतरिक्ष की तस्वीरें लेना और तारों व ग्रहों (Star-gazing) पर रिसर्च करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
- पर्यावरण पर असर: कुछ पर्यावरणविदों का यह भी मानना है कि रात में कृत्रिम रोशनी बढ़ने से उन जीव-जंतुओं और पक्षियों की लाइफ-साइकिल (Biological Clock) बिगड़ सकती है जो पूरी तरह रात के अंधेरे पर निर्भर होते हैं।
अंतरिक्ष में विशाल शीशा लगाकर रात के समय धरती पर सूरज की रोशनी चमकाने के इस ‘Earendil-1’ मिशन पर आपकी क्या राय है? क्या यह इंसानी विकास के लिए एक बेहतरीन तकनीक है या प्रकृति के नियमों के साथ खिलवाड़? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार हमारे साथ ज़रूर साझा करें। विज्ञान, स्पेस टेक्नोलॉजी की हर एक कड़क व सच्ची रिपोर्ट को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन News Darshan के साथ।
Saumya Pal
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