नई दिल्ली, इंटरनेशनल डेस्क : भारत सरकार ने अफगानिस्तान के रिहायशी इलाकों के भीतर पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा किए गए हवाई हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे क्षेत्र की शांति के लिए बड़ा खतरा बताया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बेहद कड़ा और आधिकारिक बयान जारी कर पाकिस्तान के इस कदम को “आक्रामकता का खुला कृत्य” (Blatant Act of Aggression) और अफगानिस्तान की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार दिया है। भारत ने दोटूक लहजे में कहा कि यह हमला पाकिस्तान के उस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार (Reckless Behaviour) के पुराने ढर्रे को दर्शाता है, जिसमें वह अपनी आंतरिक नाकामियों को छुपाने के लिए अपनी सीमाओं के बाहर हिंसा का सहारा लेकर हताश कोशिशें (Futile Attempt) करता है। भारत ने इस हमले में मारे गए निर्दोष अफगान नागरिकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने अटूट समर्थन को दोहराया है।
हवाई हमलों की असली वजह: कराची आतंकी हमला और TTP का कनेक्शन
इस अचानक बढ़े सैन्य तनाव की मुख्य वजह रविवार को पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ एक बड़ा आतंकी हमला था। कराची में अर्धसैनिक बल ‘सिंध रेंजर्स’ के बेस को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में पाकिस्तान के तीन जवान मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के एक कुख्यात धड़े ‘जमात-उल-अहरार’ (JuA) ने ली। इसके तुरंत बाद, बौखलाए पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने घोषणा की कि उनके सुरक्षा बलों ने इस आतंकी हमले के जवाब में अफगानिस्तान के सीमावर्ती प्रांतों में खुफिया जानकारी के आधार पर एक बड़ा जमीनी ऑपरेशन और रात के अंधेरे में हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।
जमीनी हकीकत: हमलों में 36 बेकसूर नागरिकों की मौत, तालिबान भड़का
पाकिस्तान का दावा है कि उसके लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के तीन पूर्वी प्रांतों—पक्तिया, पक्तिका और कुनार में घुसकर टीटीपी (TTP) के ठिकानों को तबाह किया और 29 लड़ाकों को मार गिराया। हालांकि, काबुल में बैठी अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे ‘क्रूरता और कायरतापूर्ण हमला’ बताया है। तालिबान के उप-प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत के अनुसार, पाकिस्तानी विमानों ने आतंकी ठिकानों के बजाय आम रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 36 बेकसूर नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई और 163 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पक्तिया प्रांत के चमकानी जिले में तो रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दोबारा बमबारी की गई, जिससे सबसे ज्यादा हताहत हुए।
कूटनीतिक टकराव बढ़ा; भारत के सख्त रुख के मायने
इस खूनी टकराव के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों (Charge d’affaires) को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा पाकिस्तान की इस कार्रवाई की इतनी कड़ी निंदा करने के पीछे एक बड़ा रणनीतिक संदेश है। भारत ने दुनिया के सामने यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद को पालने वाला पाकिस्तान अब खुद अपने ही पाले हुए आतंकियों से घिर चुका है और अपनी आंतरिक सुरक्षा की विफलता का ठीकरा पड़ोसियों पर फोड़ रहा है। इस हमले के बाद डूरंड लाइन (Durand Line) और दोनों देशों की सीमाओं पर भारी तोपखाने तैनात कर दिए गए हैं, जिससे इस पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात दोबारा पैदा हो गए हैं।
अफगानिस्तान की सीमा में घुसकर पाकिस्तान द्वारा किए गए इन हवाई हमलों में 36 बेकसूर नागरिकों की मौत और भारत सरकार द्वारा की गई इसकी कड़ी निंदा पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि आतंकवाद को पनाह देने वाले पाकिस्तान का यह कदम उसकी आंतरिक लाचारी को दिखाता है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, सामरिक विश्लेषण और हर एक कड़क व सच्ची खबर को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन (News Darsan) साथ।
Saumya Pal
National Desk News Darshan



