भोजपुरी सिनेमा के ‘पावर स्टार‘ पवन सिंह अब ‘माननीय‘ बनने की राह पर हैं। कभी लोकसभा तो कभी विधानसभा सीटों के फेर में उलझने वाले पवन सिंह को आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने बिहार विधान परिषद (MLC) का टिकट थमा दिया है।
भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने 5 जून 2026 को जारी आधिकारिक लिस्ट में उन्हें उम्मीदवार घोषित किया है. इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद, 6 जून 2026 को पवन सिंह पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का गर्मजोशी से आभार व्यक्त किया।
‘लॉलीपॉप’ के जादू से ‘पावर स्टार’ का ताज
बिहार के आरा जिले के एक छोटे से गांव जोकहरी से निकलकर, मुंबई के आलीशान लोखंडवाला तक का सफर तय करने वाले पवन सिंह की कहानी बेहद दिलचस्प है। उनके इस सफर के मुख्य पड़ाव कुछ इस तरह हैं:
ग्लोबल पहचान: साल 2008 में आए गाने ‘लॉलीपॉप लागेलू’ ने देश-विदेश में धूम मचाई और उन्हें रातों-रात इंटरनेशनल स्टार बना दिया।
एकछत्र राज: भोजपुरी सिनेमा के पर्दे पर पवन सिंह ने अपनी दमदार गायकी और हैरतअंगेज एक्शन के दम पर अपना एकछत्र राज कायम किया।
युवाओं में दीवानगी: आज बिहार और पूरे पूर्वांचल के युवाओं के बीच उनकी फैन फॉलोइंग सबसे बड़ी और मजबूत मानी जाती है।
जब-जब BJP से मिला ‘झोल’ और ‘धोखा’
पवन सिंह की राजनीतिक यात्रा किसी फिल्मी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं रही है। उनके समर्थकों का मानना है कि पार्टी ने उनके साथ कई बार सियासी खेल किया।
आसनसोल का टिकट कटा: बीजेपी ने पहले उन्हें बंगाल की आसनसोल सीट से लोकसभा उम्मीदवार बनाया, लेकिन विवादों के बाद उनका टिकट वापस हो गया
काराकाट से बगावत: टिकट कटने से नाराज पवन सिंह ने काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा
विधायक सीट पर भी हुआ खेला: इसके बाद कयास थे कि बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें बड़ी सीट मिलेगी, लेकिन एनडीए के समीकरणों के चलते वहां भी बात नहीं बन पाई
पार्टी की मजबूरी?: चुनावी रैलियों में उनके सुपरहिट गाने ‘जोड़ी मोदी और नीतीश जी के हिट होई’ ने एनडीए के लिए माहौल तो बनाया, लेकिन बदले में पवन सिंह के हाथ खाली ही रहे।
6 जून को पटना में क्या हुआ?
लगातार मिल रहे झटकों के बाद आखिरकार 5 जून को भाजपा की लिस्ट आई, जिसमें पवन सिंह का नाम सबसे ऊपर था। इसके अगले ही दिन यानी 6 जून को पटना भाजपा दफ्तर में बड़ा सियासी नजारा दिखा।
नेताओं से मुलाकात: टिकट फाइनल होने के बाद पवन सिंह सीधे सीनियर लीडरशिप से मिलने पहुंचे
पवन सिंह का बयान: “पार्टी मेरे लिए मां के समान है। मैं एक छोटा कार्यकर्ता हूं, जो भी जिम्मेदारी मिलेगी उसे पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा“।
नामांकन की तैयारी: पवन सिंह 8 जून को विधान परिषद सदस्य (MLC) पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे
राजनीतिक गलियारों में चर्चा: क्या है BJP का असली गेम प्लान?
सियासी गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी ने यह कदम बेहद सोच-समझकर उठाया है
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन: बिहार में राजपूत वोट बैंक और युवाओं को साधे रखने की कोशिश।
धैर्य का इनाम: लोकसभा चुनाव की कड़वाहट को भुलाकर पवन सिंह ने एनडीए के लिए धुआंधार प्रचार किया था, जिसका फल उन्हें मिला।
विरोधियों को जवाब: पवन सिंह को मुख्यधारा की राजनीति में लाकर भाजपा ने पूर्वांचल और बिहार में अपनी पकड़ और मजबूत करने का दांव खेला है।
तो क्या काराकाट की हार और विधानसभा के ‘झोल’ के बाद अब विधान परिषद के रास्ते पवन सिंह बिहार की राजनीति में नया ‘खेला’ करेंगे? 8 जून के नामांकन पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हैं।
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(Writer: Riya Mishra)




