कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दक्षिण 24 परगना के बारूईपुर में एक पीड़ित परिवार से मिलने जाने से पहले उनके आवास के बाहर भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए। इस घटनाक्रम के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला जा रहा है और हालात “सुपर इमरजेंसी” जैसे बना दिए गए हैं।
टीएमसी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री का उद्देश्य केवल पीड़ित परिवार से मिलकर उनका हाल-चाल जानना और उन्हें सांत्वना देना था। लेकिन जिस तरह उनके आवास के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, उससे यह संदेश गया कि उन्हें बाहर निकलने से रोकने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने इसे एक निर्वाचित मुख्यमंत्री के अधिकारों में हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि अगर जनता द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री को भी लोगों से मिलने में बाधाओं का सामना करना पड़े, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
टीएमसी ने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से भी इस मुद्दे को उठाया। पार्टी का कहना है कि विपक्षी नेताओं की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उन्हें जनता के बीच जाने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। इसी संदर्भ में टीएमसी ने मौजूदा स्थिति को “सुपर इमरजेंसी” करार दिया।
हालांकि, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का पक्ष इससे अलग है। अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। उनका कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया था। प्रशासन ने इस बात से इनकार किया कि मुख्यमंत्री की यात्रा पर किसी प्रकार की आधिकारिक रोक लगाई गई थी।
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। टीएमसी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, जबकि प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को ही अतिरिक्त पुलिस तैनाती का कारण बता रहा है। अब यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
Druti Jha
National desk, News Darshan





