बिहार के मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र से एक ऐसी राहत भरी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है, जिसने इलाज के खर्च की चिंता को हमेशा के लिए दूर कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली बिहार सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य बजट और नीतियों में एक बहुत बड़ा बदलाव करते हुए एलान किया है कि अब सालाना 4 लाख रुपये तक की कमाई वाले परिवारों का भी पूरा इलाज बिल्कुल मुफ्त किया जाएगा।
आमतौर पर देखा जाता था कि सरकारी मुफ्त इलाज योजनाओं का लाभ सिर्फ बेहद गरीब या बीपीएल (BPL) परिवारों को ही मिल पाता था, जिससे मध्यम वर्ग का एक बड़ा हिस्सा गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज के कर्ज में डूब जाता था। लेकिन अब सरकार के इस नए फैसले से राज्य के लाखों ऐसे परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा जो दिन-रात मेहनत करके जैसे-तैसे अपना गुजारा करते हैं।
इस योजना के तहत अब सिर्फ छोटी-मोटी बीमारियां ही नहीं, बल्कि किडनी ट्रांसप्लांट, कैंसर, दिल की सर्जरी और ब्रेन ट्यूमर जैसी बेहद खर्चीली और जानलेवा बीमारियों का इलाज भी पूरी तरह कैशलेस और मुफ्त होगा।
अगर इस योजना की गहराई और इसके जमीनी असर को समझें, तो बिहार में यह कदम उठाना इसलिए ज़रूरी था क्योंकि पटना के पीएमसीएच (PMCH), आईजीआईएमएस (IGIMS) और एम्स (AIIMS) जैसे बड़े अस्पतालों में हर दिन हजारों ऐसे मरीज पहुंचते हैं जो पैसे की कमी के कारण अपना इलाज बीच में ही छोड़ देते थे।
उदाहरण के तौर पर देखें तो पिछले कुछ सालों में भागलपुर, मुजफ्फरपुर और गया जैसे जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए थे जहाँ कैंसर या किडनी फेलियर के इलाज के लिए परिवारों को अपनी ज़मीन-जायदाद तक बेचनी पड़ी थी। अब इस नई व्यवस्था के लागू होने से मरीजों को किसी भी सरकारी या योजना से जुड़े प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होते समय एक भी रुपया नहीं देना होगा।
अस्पताल का जितना भी खर्च आएगा—चाहे वह महंगी दवाइयां हों, ऑपरेशन का खर्च हो या फिर डॉक्टर की फीस—उसका सीधा भुगतान सरकार द्वारा सीधे अस्पताल को किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष डिजिटल पोर्टल भी तैयार किया है ताकि मरीजों को कागजी कार्रवाई के चक्कर में भटकना न पड़े।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए परिवारों को बस अपनी सालाना आय का एक वैध प्रमाण पत्र (Income Certificate) देना होगा जो यह साबित करे कि उनकी कुल कमाई 4 लाख रुपये या उससे कम है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार,
इस योजना को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि आपातकालीन स्थिति यानी इमरजेंसी में मरीज को तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू किया जा सके और बाद में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की जा सके। यह फैसला बिहार के स्वास्थ्य ढांचे को बदलने और हर वर्ग तक बेहतर मेडिकल सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
बिहार के कोने-कोने से स्वास्थ्य जगत की ऐसी ही हर एक बड़ी और जनहित से जुड़ी योजना की बारीक से बारीक रिपोर्ट को सबसे पहले समझने के लिए जुड़े रहिए न्यूज दर्शन (News Darshan) के साथ।
Aditya Thakur, National Desk, NewsDarshan





