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महाराष्ट्र की राजनीति में महा-भूचाल: शिवसेना (UBT) में ‘ऑपरेशन टाइगर’ से मची भगदड़; उद्धव ठाकरे ने मांगी माफी और रख दी इस्तीफे की पेशकश!

महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे देश के राजनीतिक गलियारों को हिलाकर रख दिया है। साल 2022 में एकनाथ शिंदे द्वारा की गई बगावत के ठीक 4 साल बाद, शिवसेना (UBT) एक बार फिर बहुत बड़े बिखराव की कगार पर खड़ी है। इस नई बगावत को राजनीतिक हलकों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दिया जा रहा है, जिसके तहत उद्धव ठाकरे गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है और वे एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली असली शिवसेना (महायुति गठबंधन) में शामिल होने जा रहे हैं। इस बड़े झटके के बीच, शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर मुंबई के शनमुखानंद हॉल में बोलते हुए उद्धव ठाकरे बेहद भावुक हो गए। उन्होंने जनता से दलबदल को लेकर माफी मांगी है और पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने अपने इस्तीफे की पेशकश तक कर दी है।

इनसाइड स्टोरी: आखिर कौन हैं ये 6 बागी सांसद और कैसे हुई बगावत?

इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब दिल्ली में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में 9 में से सिर्फ 3 सांसद (अमरीश सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे) ही पहुंचे। बाकी के 6 सांसदों ने इस बैठक से पूरी तरह दूरी बना ली। सूत्रों के मुताबिक, इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला को शिंदे गुट में अपने विलय (Merge) के लिए एक पत्र भी भेज दिया है। बगावत करने वाले इन 6 सांसदों में बड़े नाम शामिल हैं:

1.ओमराजे निंबाळकर (धाराशिव)
2.संजय जाधव (परभणी)
3.संजय दिना पाटिल (मुंबई नॉर्थ-ईस्ट)
4.नागेश पाटिल अष्टिकर (नांदेड़)
5.भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)
6.संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम)

पार्टी के भीतर लंबे समय से यह सुगबुगाहट चल रही थी कि ये सांसद उद्धव ठाकरे की कार्यशैली और कांग्रेस व महाविकास अघाड़ी (MVA) के साथ बढ़ते झुकाव से खुश नहीं थे। उन्हें डर था कि भविष्य में शिवसेना (UBT) का अस्तित्व कांग्रेस में विलीन हो सकता है, इसी डर और शिंदे गुट के बढ़ते प्रभाव के चलते यह ‘बगावत पार्ट-2’ (Revolt 2.0) जमीन पर उतरी है।

“जनता से माफी मांगता हूँ…” – उद्धव ठाकरे का भावुक दांव

पार्टी में मची इस भगदड़ के बाद पहली बार जनता के सामने आए उद्धव ठाकरे ने इस संकट को भांपते हुए एक बड़ा इमोशनल कार्ड खेला है। उन्होंने सीधे तौर पर महाराष्ट्र और देश के उन मतदाताओं से हाथ जोड़कर माफी मांगी, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (UBT) के उम्मीदवारों को वोट दिया था। उद्धव ने कहा, “मैं आज उन मतदाताओं से माफी मांगता हूँ, जिन्होंने नरेंद्र मोदी का चेहरा देखकर नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे के नाम पर और मेरी अपील पर हमारे उम्मीदवारों को जिताया था, लेकिन आज वे सांसद गद्दारी करके चले गए।” इसके साथ ही उन्होंने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे अपने माथे से गद्दारी का कलंक कभी नहीं मिटा पाएंगे। उद्धव के बेटे और युवा नेता आदित्य ठाकरे ने भी इन बागी सांसदों को ‘बेशर्म, अहसानफरामोश और भ्रष्ट’ करार दिया है।

इस्तीफे की पेशकश और ‘चोर-लुटेरों’ वाली वो शर्त

मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने साफ कहा कि अगर पार्टी के शिवसैनिकों और कार्यकर्ताओं को उनकी लीडरशिप पर भरोसा नहीं है या उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों में सच्चाई लगती है, तो वे इसी वक्त शिवसेना (UBT) के प्रमुख का पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “मुझे नेतृत्व की कोई भूख नहीं है, मैं पद छोड़ने को तैयार हूँ, बशर्ते पार्टी का कोई आम और वफादार कार्यकर्ता इस कमान को संभाले। मेरी बस एक ही शर्त है कि बालासाहेब की यह सोने जैसी मूल्यवान शिवसेना किसी चोर, लुटेरे या डाकू के हाथ में नहीं जानी चाहिए।” उद्धव के मुंह से इस्तीफे की बात सुनते ही वहां मौजूद हजारों कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी और उनसे पद पर बने रहने की अपील की।

कांग्रेस में विलय की खबरों पर सफाई और बीजेपी पर सीधा हमला

बागी गुट द्वारा उड़ाए जा रहे इस नैरेटिव पर कि शिवसेना (UBT) कांग्रेस में मिलने जा रही है, उद्धव ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सफाई देते हुए कहा, “जब हम 30 साल तक बीजेपी के साथ गठबंधन में रहे और हमारा विलय नहीं हुआ, तो कांग्रेस के साथ विलय कैसे हो सकता है? हमारी आधी जिंदगी कांग्रेस से लड़ते हुए बीती है, इसलिए विलय का सवाल ही पैदा नहीं होता शिवसेना का जन्म मराठी मानुष के अधिकारों और कट्टर हिंदुत्व की रक्षा के लिए हुआ है।” इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में तानाशाही का माहौल बनाया जा रहा है, जहां बीजेपी पूरे देश में सिर्फ ‘एक पार्टी और कोई चुनाव नहीं’ (One Party, No Election) का सिस्टम लागू करना चाहती है और विपक्ष की पार्टियों को सरकारी एजेंसियों के दम पर खत्म करने पर तुली है। इधर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने तंज कसते हुए कहा है कि यह तो सिर्फ ट्रेलर है, असली फिल्म अभी बाकी है और उद्धव ठाकरे को खुद सोचना चाहिए कि लोग उन्हें छोड़कर क्यों भाग रहे हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में सांसदों की इस ताजा बगावत और उद्धव ठाकरे द्वारा जनता से माफी मांगने व इस्तीफे की पेशकश को आप किस तरह देखते हैं? क्या आगामी विधानसभा चुनावों में उद्धव ठाकरे इस सहानुभूति (Sympathy) के दम पर वापसी कर पाएंगे? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। महाराष्ट्र की राजनीति के इस महा-संग्राम और हर एक कड़क व सच्ची खबर का सबसे सटीक विश्लेषण देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन (News Darshan) साथ।

आदित्य ठाकुर
महाराष्ट्र ब्यूरो, न्यूज़ दर्शन (News Darshan)

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