पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हॉकर्स और छोटे सड़क विक्रेताओं के समर्थन में शुक्रवार को कोलकाता में एक विशाल विरोध मार्च का नेतृत्व किया।
यह मार्च राज्य में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियानों और फेरीवालों को हटाने की कार्रवाई के खिलाफ आयोजित किया गया।
ममता बनर्जी ने धर्मतल्ला (एस्प्लेनेड) से वेलिंगटन स्क्वायर तक पैदल मार्च किया। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक भी उनके साथ मौजूद रहे।
रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर गरीब लोगों की रोजी-रोटी नहीं छीनी जानी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी फेरीवाले को हटाने से पहले उसके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
ममता बनर्जी ने कहा कि लाखों परिवार सड़क किनारे छोटे कारोबार के जरिए अपना जीवनयापन करते हैं। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाना सामाजिक और आर्थिक रूप से उचित नहीं होगा।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण हटाना जरूरी है ताकि आम लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सके।
हॉकर्स के मुद्दे पर बढ़ती राजनीतिक बहस के बीच ममता बनर्जी का सड़क पर उतरना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम एक बड़े मतदाता वर्ग तक सीधे पहुंचने और उनकी चिंताओं को उठाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल, हॉकर्स के पुनर्वास और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज बनी हुई है।
Druti jha
National desk, News Darshan



