श्रीनगर/चंडीगढ़ : जम्मू-कश्मीर में शादी-ब्याह के पीक सीजन के बीच घाटी में एक अभूतपूर्व खाद्य संकट खड़ा हो गया है। कश्मीर का पारंपरिक और बहुचर्चित व्यंजन ‘वाज़वान’ (Wazwan), जो मटन (भेड़-बकरी के मांस) के बिना अधूरा माना जाता है, इस समय गंभीर आपूर्ति संकट से जूझ रहा है। संकट की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मोर्चा संभाला और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक कड़ा पत्र लिखकर पंजाब के राजमार्गों पर पशु ले जा रहे ट्रकों से हो रही अवैध वसूली को तुरंत रोकने की मांग की।
क्या है पूरा मामला? क्यों ठप हुई मटन की सप्लाई?
ऑल कश्मीर होलसेल मटन डीलर्स एसोसिएशन (AKWMDA) के अनुसार, कश्मीर में बिकने वाले अधिकांश लाइवस्टॉक (पशु) राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों से मंगवाए जाते हैं। इन राज्यों से आने वाले सभी ट्रकों को पंजाब के रास्ते ही जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करना होता है।
मटन डीलर्स का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से पंजाब के शंभू बॉर्डर, मादवपुर और अन्य हाईवे चेकपॉइंट्स पर कुछ स्थानीय ठेकेदार समूहों द्वारा कश्मीर जाने वाले ट्रकों को जबरन रोका जा रहा था। वैध दस्तावेज, ट्रांजिट परमिट और जीएसटी छूट होने के बावजूद, इन गाड़ियों से प्रति ट्रक ₹20,000 से ₹25,000 तक की अवैध वसूली (जिसे स्थानीय व्यापारी ‘गुंडा टैक्स’ कह रहे हैं) की जा रही थी। इस जबरन वसूली और उत्पीड़न के विरोध में डीलर्स ने करीब 9 दिनों तक लाइवस्टॉक का आयात पूरी तरह बंद कर दिया था, जिससे कश्मीर की मंडियां सूनी हो गईं।
सीएम उमर अब्दुल्ला का कड़ा रुख और भगवंत मान को पत्र
इस संकट के कारण कश्मीर में मटन की कीमतें ₹700 से बढ़कर ₹750 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं और कई इलाकों में कसाई की दुकानें पूरी तरह बंद हो गईं। मामले के तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पंजाब के सीएम भगवंत मान को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की अपील की।उमर अब्दुल्ला ने अपने पत्र में जम्मू-कश्मीर खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की आंतरिक समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा:
“हमारे व्यापारी पंजाब में न तो कोई माल खरीद रहे हैं और न ही बेच रहे हैं। वे केवल राजस्थान से पशु लाकर जम्मू-कश्मीर जा रहे हैं और सिर्फ पंजाब के राष्ट्रीय राजमार्ग का उपयोग कर रहे हैं। बिना किसी कानूनी मंजूरी के इन वाहनों से मोटी रकम वसूलना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। यह उन व्यापारियों के साथ घोर अन्याय है जिनके पास सभी वैध दस्तावेज हैं।”
उन्होंने आगे चेतावनी भी दी कि यदि पंजाब सरकार इस पर जल्द कार्रवाई नहीं करती है, तो जम्मू-कश्मीर इस मुद्दे को ‘उत्तरी क्षेत्रीय परिषद’ (Northern Zonal Council) और भारत सरकार के समक्ष उठाएगा।
वाज़वान और कश्मीरी शादियों पर पड़ा सीधा असर
कश्मीर में अगस्त से शादियों का मुख्य सीजन शुरू होने वाला है और फिलहाल इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। कश्मीरी शादियों में औसतन 500 किलोग्राम से लेकर 1 टन तक मटन की खपत होती है। आपूर्ति ठप होने के कारण घाटी में 150 से अधिक शादियों को या तो स्थगित करना पड़ा है या लोगों को अपने मेनू में भारी बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर यह गतिरोध लंबा खिंचता तो उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता।
राहत की खबर: पंजाब सरकार के आश्वासन के बाद हड़ताल वापस
उमर अब्दुल्ला के पत्र और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के हस्तक्षेप के बाद पंजाब प्रशासन तुरंत हरकत में आया। दोनों राज्यों के पशुपालन और संबंधित विभागों के आला अधिकारियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद पंजाब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
पंजाब सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वैध दस्तावेजों वाले किसी भी पशु वाहन को पंजाब की सीमा या राजमार्गों पर नहीं रोका जाएगा और न ही कोई अनधिकृत शुल्क वसूला जाएगा। इस ठोस आश्वासन के बाद शुक्रवार (3 जुलाई, 2026) को कश्मीर मटन डीलर्स एसोसिएशन ने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेने का ऐलान कर दिया है। व्यापारियों ने कहा है कि वे अगले कुछ दिनों तक जमीनी स्तर पर स्थिति की समीक्षा करेंगे, लेकिन फिलहाल पंजाब से कश्मीर के लिए ट्रकों की रवानगी फिर से शुरू की जा रही है, जिससे जल्द ही घाटी में मांस की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी।
रिया मिश्रा
नेशनल डेस्क | न्यूज़ दर्शन





