बिहार की राजनीति और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पिछले कुछ घंटों से मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह उर्फ ‘छोटे सरकार’ के एक्सीडेंट को लेकर चल रही खबरें पूरी तरह से भ्रामक और निराधार साबित हुई हैं। सोशल मीडिया पर कुछ पेजों द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि एक शादी समारोह से पटना लौटने के दौरान अनंत सिंह के काफिले की एक तेज रफ्तार ट्रक से टक्कर हो गई, जिसमें वे बाल-बाल बचे हैं। इस अफवाह के सामने आते ही उनके समर्थकों के बीच भारी चिंता देखी गई, लेकिन उनके करीबी सूत्रों और आधिकारिक जांच में यह साफ हो गया है कि पूर्व विधायक पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित हैं। उनके साथ ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ है।
कौन हैं अनंत सिंह और कहां के रहने वाले हैं?
बिहार की सियासत में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह का जन्म पश्चिम चम्पारण या पटना के शहरी इलाकों में नहीं, बल्कि पटना जिले के ही मोकामा (Mokama) प्रखंड के लदमा (Ladma) गांव में हुआ था। वे इसी भूमि के मूल निवासी हैं और यहीं से उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत की थी।
शुरुआती दौर में उनके बड़े भाई दिलीप सिंह बिहार सरकार में मंत्री रह चुके थे, जिनके साए में अनंत सिंह ने राजनीति के दांव-पेंच सीखे। दिलीप सिंह के बाद मोकामा क्षेत्र में अनंत सिंह का दबदबा ऐसा बढ़ा कि लोग उन्हें सम्मान और डर के मिले-जुले भाव से ‘छोटे सरकार’ कहकर बुलाने लगे। अनंत सिंह का रहन-सहन, उनका पारंपरिक अंदाज, घोड़ों और हाथियों को पालने का शौक उन्हें बिहार के अन्य राजनेताओं से बिल्कुल अलग और चर्चा में बनाए रखता है।
बाहुबल से लेकर विधानसभा तक का सफर
अनंत सिंह की कहानी सिर्फ एक साधारण नेता की नहीं है, बल्कि उनका इतिहास काफी उतार-चढ़ाव और विवादों से भरा रहा है:
- लगातार पांच बार विधायक: अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट पर दशकों तक राज किया है। उन्होंने साल 2005 में पहली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू (JDU) के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद वे लगातार इस सीट से विधानसभा पहुंचते रहे।
- जेल से जीता चुनाव: साल 2015 में नीतीश कुमार से राजनीतिक मतभेद होने के बाद उन्होंने जदयू छोड़ दी, लेकिन उनका दबदबा ऐसा था कि 2015 का चुनाव उन्होंने जेल में बंद रहते हुए भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भारी मतों से जीत लिया। इसके बाद 2020 में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लालटेन छाप पर चुनाव जीता।
- कानूनी विवाद और सदस्यता जाना: अनंत सिंह का नाम कई आपराधिक मामलों और विवादों से भी जुड़ा रहा। साल 2019 में उनके पैतृक गांव लदमा स्थित घर पर पुलिस छापेमारी के दौरान एक एके-47 (AK-47) राइफल और हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ था। इस मामले में कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें अपनी विधायकी गंवानी पड़ी थी, जिसके बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने मोकामा से उपचुनाव जीता।
क्षेत्र में आज भी बरकरार है प्रभाव
तमाम कानूनी मुकदमों, जेल यात्राओं और विवादों के बावजूद मोकामा, बाढ़ और आसपास के इलाकों में अनंत सिंह का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव बेहद मजबूत माना जाता है। उनके समर्थक उन्हें गरीबों का मसीहा मानते हैं, जो सीधे तौर पर लोगों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। वर्तमान में वे भले ही खुद विधायक न हों, लेकिन बिहार की राजनीति में उनकी मर्जी के बिना मोकामा का समीकरण नहीं बदलता। यही वजह है कि जब भी उनसे जुड़ी कोई छोटी सी भी खबर या अफवाह सामने आती है, तो पूरे बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच जाती है।
मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह के इस लंबे राजनीतिक सफर और उनके प्रभाव को आप किस तरह देखते हैं? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार हमारे साथ ज़रूर साझा करें। बिहार की राजनीति, नेताओं के इतिहास और हर एक खबर का सटीक विश्लेषण देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन (News Darshan) साथ।
Saumya Pal
National Desk News Darshan



