प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में एक और बड़ा राजनीतिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। इस मौके पर देशभर में उनके समर्थक और बीजेपी कार्यकर्ता विशेष पूजा-पाठ, हवन और महा-पूजाओं का आयोजन कर रहे हैं। वाराणसी के मंदिरों से लेकर गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और दक्षिण भारत के कई राज्यों तक धार्मिक अनुष्ठानों, मंत्रोच्चार और सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
देश के कई राज्यों में बीजेपी नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं, संतों और समर्थकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बड़े राजनीतिक रिकॉर्ड को लेकर महा-पूजा, हवन और विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया।
वाराणसी के घाटों से लेकर अहमदाबाद के मंदिरों तक भक्तिमय माहौल देखने को मिला, जहां पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रधानमंत्री की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और निरंतर नेतृत्व के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। समर्थकों ने मोदी सरकार के समर्थन में नारे लगाए, जबकि कई लोगों ने इस अवसर को “राष्ट्रीय गौरव का क्षण” बताया।
नई दिल्ली में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विशेष हवन आयोजित किए और आम जनता के बीच मिठाइयाँ बांटीं। कुछ कार्यक्रमों में सामुदायिक भोज, रक्तदान शिविर और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन स्थानीय बीजेपी इकाइयों और सामाजिक संगठनों द्वारा किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आध्यात्मिक गुरुओं और स्थानीय समर्थकों ने गंगा घाटों पर विशेष गंगा आरती और सामूहिक प्रार्थनाओं का आयोजन किया। वहीं अयोध्या में आयोजित धार्मिक सभाओं में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को राम मंदिर निर्माण से जोड़ते हुए इसे एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक उपलब्धि बताया गया। गुजरात में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मंदिरों में दर्शन और सामूहिक प्रार्थना कार्यक्रम आयोजित किए, जहां मोदी के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक के राजनीतिक सफर को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।
कई विपक्षी नेताओं ने इन आयोजनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की उपलब्धियों का आकलन आर्थिक और सामाजिक संकेतकों के आधार पर होना चाहिए, न कि धार्मिक अभियानों के माध्यम से। वहीं बीजेपी ने इन आयोजनों का बचाव करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम प्रधानमंत्री के प्रति जनता के प्रेम, सम्मान और आभार की स्वैच्छिक अभिव्यक्ति हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देशभर में आयोजित ये धार्मिक कार्यक्रम भारतीय राजनीति में बढ़ती व्यक्तित्व-आधारित राजनीति को दर्शाते हैं, जहां राजनीतिक नेतृत्व को बड़े जनसमूह, सांस्कृतिक प्रतीकों और धार्मिक आयोजनों के जरिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में हो रही पूजा-अर्चनाओं और महा-पूजाओं के बीच आस्था, प्रतीकवाद और राजनीति को लेकर बहस भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ऐसे सार्वजनिक आयोजन भविष्य की राजनीति और चुनावी माहौल को किस तरह प्रभावित करते हैं।
Shreya singh, National Desk, News Darshan.


