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राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग के बाद झारखंड में सियासी भूचाल: JMM का सहयोगियों को दोटूक संदेश- ‘हेमंत-राहुल अब 56 नहीं, सिर्फ 50 विधायकों के नेता’!

नेशनल डेस्क | न्यूज़ दर्शन

झारखंड: झारखंड की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर की अंदरूनी रार को पूरी तरह उजागर कर दिया है। हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों और उसमें हुई बड़े पैमाने पर ‘क्रॉस वोटिंग’ के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने कांग्रेस, वामपंथी दलों (Left) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को एक बेहद कड़ा और रणनीतिक संदेश जारी किया है। जेएमएम के शीर्ष सूत्रों की ओर से साफ कहा गया है कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी और गठबंधन के भीतर जो सेंधमारी हुई है, उसके बाद अब राज्य की विधानसभा में सत्ता पक्ष का गणित बदल गया है। जेएमएम ने दोटूक अंदाज में कहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब 56 विधायकों के नहीं, बल्कि केवल 50 वफादार विधायकों के नेता रह गए हैं।

राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने बिगाड़ा खेल; कहाँ गए 6 विधायक?

इस पूरे विवाद की जड़ राज्यसभा चुनाव के दौरान सत्ताधारी गठबंधन के विधायकों द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग है। गठबंधन को उम्मीद थी कि उनके सभी विधायक एकजुट होकर तय रणनीति के मुताबिक मतदान करेंगे, लेकिन वोटिंग के दौरान गठबंधन के कम से कम 6 विधायकों ने पाला बदल लिया या बागी रुख अख्तियार करते हुए विपक्ष (बीजेपी गठबंधन) के पक्ष में मतदान कर दिया। जेएमएम के रणनीतिकारों का मानना है कि इन 6 विधायकों की गद्दारी के चलते न सिर्फ गठबंधन की किरकिरी हुई, बल्कि यह भी साफ हो गया कि कुछ लोग सिर्फ नाम के लिए गठबंधन के साथ खड़े हैं। इसी का संज्ञान लेते हुए जेएमएम ने अब अपने आधिकारिक आंकड़ों को संशोधित करते हुए बागी गुट को अपने संख्या बल (56) से अलग कर दिया है और वास्तविक ताकत को 50 घोषित किया है।

जेएमएम का लेफ्ट और आरजद (RJD) को क्या है सीधा संदेश?

इस नए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने सहयोगी दलों—विशेषकर आरजेडी और वामपंथी दलों को बहुत ही सीधा और सख्त संदेश दिया है:

  • मंत्रिमंडल और फैसलों में दबाव बर्दाश्त नहीं: जेएमएम ने साफ कर दिया है कि संख्या बल में आई इस गिरावट के बाद अब सहयोगी दल सरकार पर किसी भी तरह का अनुचित राजनीतिक दबाव (जैसे ज्यादा मंत्रियों के पद या मनपसंद विभाग) बनाने की कोशिश न करें।
  • बदली परिस्थितियों में नया तालमेल: जेएमएम ने सहयोगियों को यह भी संदेश दिया है कि आने वाले समय में होने वाले नीतिगत फैसलों और सीटों के बंटवारे में अब 50 विधायकों की जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर ही बात आगे बढ़ेगी। बागी विधायकों पर कड़ा रुख अपनाते हुए पार्टी ने संकेत दिया है कि जो लोग गठबंधन की नीतियों के प्रति वफादार नहीं हैं, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

हेमंत सोरेन और कांग्रेस के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती

इस सियासी उठापटक ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड में कांग्रेस के नेतृत्व के सामने एक नया संकट खड़ा कर दिया है। 56 से घटकर 50 विधायकों पर आने का मतलब यह है कि सरकार बहुमत के आंकड़े के लिहाज से अब और अधिक संवेदनशील स्थिति में पहुंच गई है। हालांकि सरकार को फिलहाल कोई तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन जेएमएम और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को अब अपने बचे हुए 50 विधायकों को एकजुट रखना होगा। राहुल गांधी की मौजूदगी में विपक्षी एकता के जो बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे, झारखंड के इस राज्यसभा चुनाव ने उन दावों की जमीनी कमजोरी को उजागर कर दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जेएमएम के इस कड़े संदेश पर आरजेडी और लेफ्ट पार्टियां क्या प्रतिक्रिया देती हैं।

झारखंड में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग और जेएमएम द्वारा अपने सहयोगियों को दिए गए इस कड़े संदेश पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि इस टूट के बाद हेमंत सोरेन सरकार अपना कार्यकाल मजबूती से पूरा कर पाएगी? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार हमारे साथ ज़रूर साझा करें। झारखंड की राजनीति, सत्ता के गलियारों के समीकरण और हर एक कड़क व सच्ची खबर को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन (News Darsan) साथ।

Saumya Pal
National Desk News Darshan

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