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राम मंदिर खजाने पर गहराया विवाद: करोड़ों के सोने-चांदी और हीरों के चढ़ावे का नहीं मिल रहा हिसाब; उठ रहे हैं कई कड़े सवाल!

नेशनल डेस्क | न्यूज़ दर्शन

अयोध्या: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर में दिल खोलकर सोने, चांदी, हीरे और नकद राशि का दान किया है। लेकिन इस बीच राम मंदिर के इस महा-खजाने को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज विवाद सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल वीडियो के अनुसार, कई प्रतिष्ठित संस्थाओं और वीआईपी श्रद्धालुओं द्वारा भगवान राम के चरणों में अर्पित किए गए करोड़ों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात, ईंटें और दीपक मंदिर के आधिकारिक रिकॉर्ड से गायब बताए जा रहे हैं या उनका कोई लिखित हिसाब नहीं मिल रहा है। इस खुलासे के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

आखिर क्या-क्या सामान खजाने से बताया जा रहा है गायब?

मंदिर के खजाने से जुड़े ऑडिट और दावों के मुताबिक, कई ऐसे बेशकीमती सामान हैं जिन्हें बड़े ही श्रद्धा भाव से मंदिर को सौंपा गया था, लेकिन अब वे रिकॉर्ड में नहीं मिल रहे हैं:

  • 200 किलो चांदी की ईंट: सिंधी समाज की ओर से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के जरिए भगवान को 200 किलो चांदी की ईंटें भेंट की गई थीं, जिनका फिलहाल कोई अता-पता नहीं मिल रहा है।
  • 35 किलो चांदी और 3 किलो चांदी का दीपक: इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मेंबर्स द्वारा चढ़ाए गए 35 किलो चांदी के आभूषण और भगवान की आरती के लिए अर्पित किया गया 3 किलो वजनी चांदी का भव्य दीपक भी रिकॉर्ड से नदारद है।
  • 60 किलो चांदी की शिलाएं: उत्तर भारत ज्वैलर्स संगठन के अध्यक्ष द्वारा मंदिर निर्माण और खजाने के लिए 60 किलो चांदी की शिलाएं समर्पित की गई थीं, जिनका कोई हिसाब नहीं मिल पा रहा है।
  • हीरे का हार और सोने की चरण पादुका: सूरत के कुछ बड़े हीरा व्यापारियों और श्रद्धालुओं ने पूर्व नेता टिन्नू यादव के माध्यम से रामलला के लिए हीरों का कीमती हार और सोने की चरण पादुकाएं भिजवाई थीं। अब वे लोग भी इसका आधिकारिक हिसाब मांग रहे हैं। इसके अलावा मुंबई के एक श्रद्धालु अजय विश्वकर्मा द्वारा चढ़ाया गया चांदी का हार और चरण पादुका भी गायब बताई जा रही है।

क्या है इसके पीछे का पूरा गणित और श्रद्धालु क्यों हैं परेशान?

दरअसल, इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ ‘रसीद और रिकॉर्ड’ का न होना है। नियमों के मुताबिक, जब भी कोई श्रद्धालु मंदिर में कोई कीमती धातु या सामान दान करता है, तो उसे मंदिर ट्रस्ट की ओर से एक आधिकारिक रसीद (Receipt) दी जाती है और उस सामान को लॉकर या खजाने के रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। लेकिन इस मामले में आरोप है कि कई बड़े चढ़ावे सीधे ट्रस्ट के पदाधिकारियों या उनके करीबियों के जरिए सौंपे गए, जिनकी कोई पक्की रसीद दानदाताओं को नहीं मिली। अब जब इन चढ़ावों का ऑडिट या हिसाब मांगा जा रहा है, तो ट्रस्ट के पास इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। जिन श्रद्धालुओं ने अपनी पूरी आस्था के साथ ये कीमती चीजें चढ़ाई थीं, वे अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि उनका चढ़ावा आखिर गया कहां?

इस पूरे विवाद पर राम मंदिर ट्रस्ट का क्या है रुख?

इस बड़े विवाद और सोशल मीडिया पर उड़ती खबरों के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों का कहना है कि मंदिर में आने वाले दान की प्रक्रिया बेहद सुरक्षित और पारदर्शी है। ट्रस्ट के मुताबिक, प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान और उसके बाद इतनी भारी मात्रा में सोना-चांदी और अन्य कीमती सामान आए हैं कि उनके मूल्यांकन (Evaluation), तौल और उन्हें पिघलाकर सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में काफी समय लग रहा है। कई सामानों को सरकारी टकसाल (Mint) या सुरक्षित बैंक लॉकरों में जांच के लिए भेजा गया है। हालांकि, विपक्ष और आम जनता की ओर से मांग की जा रही है कि रामलला के खजाने को लेकर ट्रस्ट को एक श्वेत पत्र (White Paper) या पूरी लिस्ट सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि करोड़ों भक्तों की आस्था और उनके दान पर कोई आंच न आए।

राम मंदिर के खजाने से करोड़ों के सोने-चांदी के सामान का हिसाब न मिलने के इस गंभीर विवाद को आप किस तरह देखते हैं? क्या आपको लगता है कि इस मामले की किसी बड़ी केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। देश-दुनिया, धर्म और हर एक कड़क व सच्ची खबर को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन (News Darsan) साथ।

Saumya Pal
National Desk News Darshan

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