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इथेनॉल ब्लेंडिंग पर फिलहाल ब्रेक: सरकार ने E20 से आगे बढ़ने का फैसला टाला

देश में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने को लेकर चल रही चर्चा के बीच केंद्र सरकार ने फिलहाल बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने साफ किया है कि अभी E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण से आगे बढ़ने की कोई योजना नहीं है। ई25 या ई30 लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। सरकार का कहना है कि लोगों की चिंताओं, वाहन कंपनियों की राय और तकनीकी तैयारियों को देखते हुए आगे का निर्णय बाद में लिया जाएगा। हालांकि, E20 कार्यक्रम पहले की तरह पूरे देश में जारी रहेगा।

क्या है इथेनॉल ब्लेंडिंग?
इथेनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराना है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने चरणबद्ध तरीके से इथेनॉल मिश्रण बढ़ाया है और अब देश E20 चरण तक पहुंच चुका है, यानी पेट्रोल में अधिकतम 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जा रहा है।

E20 के बाद की योजना पर रोक क्यों लगी?
E20 से आगे बढ़कर E25 या E30 लागू करने के प्रस्ताव पर कई सवाल उठे। आम लोगों, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े संगठनों ने चिंता जताई कि क्या पुराने वाहन अधिक इथेनॉल वाले ईंधन के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं। इसके अलावा माइलेज पर असर, खाद्य फसलों के इस्तेमाल और पानी की बढ़ती खपत जैसे मुद्दे भी सामने आए। इन सभी पहलुओं और जन प्रतिक्रिया को देखते हुए सरकार ने फिलहाल E20 से आगे बढ़ने का फैसला टाल दिया है। सरकार का कहना है कि आगे का निर्णय व्यापक अध्ययन और सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

₹70 प्रति लीटर इथेनॉल का मुद्दा क्या है?
हाल के दिनों में इथेनॉल की खरीद कीमत भी चर्चा का विषय बनी हुई है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा करीब ₹70 प्रति लीटर की दर से इथेनॉल खरीदने की बात को लेकर बहस तेज हुई। आलोचकों का कहना है कि ऐसी नीति बनाते समय किसानों, तेल कंपनियों और आम उपभोक्ताओं—तीनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि पेट्रोल की कीमतों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। वहीं सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था घरेलू बायोफ्यूल उत्पादन को बढ़ावा देने और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए बनाई गई है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग से क्या फायदे हुए?
भले ही E20 से आगे की योजना फिलहाल टाल दी गई हो, लेकिन सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से देश को कई महत्वपूर्ण लाभ मिले हैं। इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिली है और किसानों व चीनी मिलों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर बने हैं। साथ ही यह कार्यक्रम भारत के स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय ईंधन के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

आगे क्या होगा?
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल E20 कार्यक्रम पूरे देश में जारी रहेगा। लेकिन E25 या E30 जैसे उच्च स्तर के इथेनॉल मिश्रण पर कोई भी फैसला तकनीकी परीक्षण, वाहनों की तैयारी, ईंधन वितरण व्यवस्था, उपभोक्ताओं की स्वीकार्यता और आर्थिक प्रभावों का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा। यानी अभी वाहन चालक E20 ईंधन का ही उपयोग करते रहेंगे, जबकि सरकार भविष्य की नीति पर विचार जारी रखेगी।

सरकार का यह फैसला साफ संकेत देता है कि वह पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ-साथ आम जनता की चिंताओं और तकनीकी चुनौतियों को भी गंभीरता से देख रही है। भारत स्वच्छ ईंधन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन E20 से आगे का सफर तभी तय होगा जब वैज्ञानिक अध्ययन, उद्योग की तैयारी और लोगों का भरोसा—तीनों साथ होंगे। फिलहाल देश का लक्ष्य E20 ही रहेगा, जबकि E25 और E30 पर फैसला आगे की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।

Shreya singh,
National desk,News darshan.

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