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झारखंड में छात्र प्रदर्शन तेज: विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस ने किया लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार, 10 अगस्त को और तेज हो गया। रांची में हजारों छात्र और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी विधानसभा घेराव के लिए मार्च पर निकले। प्रदर्शनकारी JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। आंदोलन का यह 17वां दिन है।

प्रदर्शनकारियों ने पुराने विधानसभा भवन से करीब 10:30 बजे मार्च शुरू किया। रास्ते में पुलिस ने कई स्तरों पर बैरिकेडिंग और कंटीले तार लगाए थे। प्रदर्शनकारियों के कई बैरिकेड पार करने के बाद जगन्नाथपुर मंदिर के पास पुलिस ने पहले वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और इसके बाद भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया। पुलिस की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने का दावा किया गया है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने महिला छात्रों के घायल होने और सिर, हाथ तथा चेहरे पर चोट लगने की भी बात कही है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना या उसकी निष्पक्ष जांच कराना, 14वीं JPSC सिविल सर्विस परीक्षा सहित कई विवादित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करना और कथित अनियमितताओं की CBI जांच कराना शामिल है। छात्र संगठन JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक संरचनात्मक सुधार तथा परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की भी मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी CBI जांच के विकल्प के रूप में झारखंड के बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों के पैनल से जांच कराने की मांग भी कर रहे हैं।

विवाद के बीच झारखंड सरकार ने रविवार को कहा था कि वह प्रदर्शनकारियों की करीब 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार कर चुकी है। सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा और JPSC Backlog 2023 तथा Backlog 2025 परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई है। साथ ही 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े आपराधिक मामलों की जांच CID से और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए ED से कराने की बात कही गई है। सरकार ने JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार के लिए IIM Ranchi, IIT-ISM Dhanbad और XLRI जैसे संस्थानों की मदद लेने की भी बात कही है।

हालांकि, छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने से इनकार किया है। सरकार का तर्क है कि यह परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत हुई थी और इसके आधार पर चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियां भी हो चुकी हैं। सरकार ने इस मामले की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच/मॉनिटरिंग कमेटी का प्रस्ताव दिया, लेकिन छात्र CBI जांच की मांग पर कायम रहे।

आंदोलन के प्रमुख चेहरों में छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो भी शामिल हैं, जो 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। 10 अगस्त को उन्होंने एंबुलेंस से विधानसभा मार्च में हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान छात्र तिरंगा लेकर पहुंचे और भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने तथा स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर नारे लगाए।

प्रशासन ने विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए करीब 1,500 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था। विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई थी। इसके बावजूद छात्रों के मार्च के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी।

इस बीच मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। झारखंड CID ने सोमवार को पूर्व JPSC चेयरपर्सन L. Khiangte को भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया। इससे छात्रों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग के बीच मामला और गंभीर हो गया है।

वहीं, ED ने भी JPSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं के संबंध में Prevention of Money Laundering Act के तहत मामला दर्ज किया है। इससे भर्ती परीक्षाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच का दायरा बढ़ गया है। हालांकि, छात्र अब भी पूरे मामले को CBI को सौंपने की मांग पर अड़े हुए हैं।

झारखंड सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद गतिरोध खत्म नहीं हुआ है। सरकार का दावा है कि अधिकांश मांगें मान ली गई हैं, जबकि छात्र संगठनों का कहना है कि जिन परीक्षाओं को वे रद्द कराने की मांग कर रहे हैं, उनमें से अभी केवल तीन पर सरकार ने सहमति दी है। ऐसे में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के रोजगार से जुड़ा यह आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है।

Aarya Mishra
National Desk, News Darshan

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