देश की राजनीति में एक बार फिर RSS चर्चा के केंद्र में है। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
प्रियंक खड़गे ने कहा कि जिस देश में एक छोटा दुकानदार, ठेला लगाने वाला और कई संस्थाओं को रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, वहां RSS को लेकर नियम अलग क्यों हैं?
इस बयान के बाद सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि देश में काम करने वाली हर संस्था को जवाबदेही और पारदर्शिता के दायरे में होना चाहिए। वहीं बीजेपी ने इसे RSS को बदनाम करने की कोशिश बताया है।
RSS देश का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन माना जाता है, जिसके लाखों स्वयंसेवक देशभर में सक्रिय हैं। स्वतंत्रता के बाद से लेकर आज तक संघ कई बार राजनीतिक विवादों के केंद्र में रहा है, लेकिन इसके समर्थक इसे राष्ट्र निर्माण से जुड़ा संगठन बताते हैं।
अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान है, या फिर आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कोई बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है?
एक तरफ कांग्रेस जवाबदेही की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे वैचारिक हमला बता रही है।
यानी मामला सिर्फ रजिस्ट्रेशन का नहीं, बल्कि देश की दो सबसे बड़ी राजनीतिक विचारधाराओं के टकराव का बनता जा रहा है।
फिलहाल इस खबर में इतना ही। राजनीति की ऐसी तमाम बड़ी खबरों और निष्पक्ष विश्लेषण के लिए बने रहिए News Darshan के साथ।




