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इतिहास का सबसे खतरनाक अल नीनो? 2026 में रिकॉर्ड तोड़ सकता है ‘मॉन्स्टर’ एल नीनो, वैज्ञानिकों की चेतावनी |

वेब डेस्क | 17 जुलाई 2026 :- प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रहा एल नीनो (El Niño) दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी (BoM) और कई अंतरराष्ट्रीय जलवायु विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 2026-27 का एल नीनो हाल के इतिहास का सबसे शक्तिशाली एल नीनो बन सकता है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि मध्य जुलाई तक समुद्र की सतह का तापमान 1982-83 और 2015-16 के ऐतिहासिक “सुपर एल नीनो” के स्तर को चुनौती दे रहा है।

एल नीनो क्या है?
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। कई क्षेत्रों में सूखा, भीषण गर्मी और जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है, जबकि कुछ देशों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है।

क्यों बढ़ी वैज्ञानिकों की चिंता?
BoM के अनुसार, प्रशांत महासागर में समुद्री तापमान लगातार बढ़ रहा है और जलवायु मॉडल संकेत दे रहे हैं कि यह एल नीनो रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह अनुमान सही साबित हुआ, तो वैश्विक तापमान में नई रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो सकती है और वर्ष 2027 अब तक का सबसे गर्म वर्ष बन सकता है।

दुनिया पर क्या पड़ सकता है असर?
एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में सूखा और भीषण गर्मी का खतरा।
जंगलों में आग (Wildfire) की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
कई देशों में फसलों का उत्पादन प्रभावित होने से खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका।
कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ जैसी चरम मौसम घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

भारत पर संभावित प्रभाव
भारत में एल नीनो का असर अक्सर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है, जिससे कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। हालांकि, भारतीय मौसम विभाग (IMD) समय-समय पर अलग से अपने पूर्वानुमान जारी करता है और भारत पर वास्तविक प्रभाव कई अन्य मौसम प्रणालियों पर भी निर्भर करेगा। फिलहाल विशेषज्ञ स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि 2026-27 का एल नीनो वैश्विक मौसम प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। हालांकि इसकी अंतिम तीव्रता आने वाले महीनों में स्पष्ट होगी, लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि दुनिया को अत्यधिक गर्मी, मौसम की चरम घटनाओं और कृषि पर संभावित प्रभावों के लिए तैयार रहना चाहिए।

Manvee singh
National desk, News darshan.

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