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संसद से पास हुआ MSME संशोधन विधेयक 2026: जानिए छोटे कारोबारियों के लिए क्यों खास है यह नया कानून!

नई दिल्ली (न्यूज़ दर्शन ब्यूरो): देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को बड़ा बढ़ावा देने के लिए संसद ने MSMED (संशोधन) विधेयक, 2026 को हरी झंडी दे दी है। 3 अगस्त को राज्यसभा और 7 अगस्त 2026 को लोकसभा से पास हुआ यह कानून साल 2006 में बने मूल MSMED एक्ट की जगह लेगा, जिसने अपने 20 साल पूरे कर लिए हैं। देश में लगभग 40 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार देने वाले इस सेक्टर को डिजिटल युग के हिसाब से ढालने और व्यापार को आसान बनाने के मकसद से यह ऐतिहासिक बदलाव किया गया है।

उद्यम पोर्टल को स्थायी दर्जा और पारदर्शी व्यवस्था

इस नए संशोधन के तहत ‘उद्यम पोर्टल’ (Udyam Portal) को MSMEs के लिए एक स्थायी, डिजिटल, मुफ्त और स्वैच्छिक रजिस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म के रूप में कानूनी मान्यता दे दी गई है। वर्तमान में इस पोर्टल पर पंजीकृत MSMEs की संख्या 1.65 करोड़ से बढ़कर 9.16 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा, प्लांट-मशीनरी में निवेश और टर्नओवर के दोहरे मापदंड (Twin Criterion) को अब कानून में वैधानिक रूप से शामिल कर लिया गया है, जिससे कारोबारियों को अपनी श्रेणी तय करने में किसी भ्रम का सामना नहीं करना पड़ेगा।

बकाये भुगतान पर कसा शिकंजा, 90 दिनों में होगा फैसला

छोटे कारोबारियों की सबसे बड़ी समस्या ‘भुगतान में देरी’ (Delayed Payments) को दूर करने के लिए कानून में कड़े प्रावधान किए गए हैं। अब किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए ऑनलाइन डिस्प्यूट रिजोल्यूशन (ODR) की व्यवस्था की गई है। नए नियमों के अनुसार, मध्यस्थता (Mediation) की प्रक्रिया को पहली सुनवाई के 90 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। यदि कोई खरीदार कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करता है और मामला 6 महीने से अधिक समय से लंबित है, तो अदालत को अनिवार्य रूप से बकाये की कम से कम 50% राशि छोटे सप्लायर को जारी करने का आदेश देना होगा। इसके अलावा, फैसिलिटेशन काउंसिल द्वारा तय बकाये की वसूली अब जिलाधिकारी (District Collector) के माध्यम से ‘भू-राजस्व के बकाये’ (Arrear of Land Revenue) की तरह की जा सकेगी, जिससे पैसे फंसने का डर खत्म होगा।

कैश फ्लो को मजबूती और नियमों में ढील (Ease of Doing Business)

MSMEs को समय पर पैसा मिले, इसके लिए सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के लिए इनवॉइस का निपटान TReDS (Trade Receivables Discounting System) प्लेटफॉर्म के ज़रिए करना अनिवार्य कर दिया गया है। TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग का कारोबार साल 2022-23 के ₹40,000 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹3.47 लाख करोड़ हो चुका है। इसके साथ ही, कारोबारियों को राहत देते हुए कानून का ‘अपराधीकरण’ (Decriminalization) खत्म कर दिया गया है। अब रजिस्ट्रेशन न कराने या जानकारी में गलती होने पर जेल या भारी जुर्माने के बजाय ‘चेतावनी’ और चरणबद्ध तरीके से मामूली सिविल पेनल्टी (Graded Civil Penalty) की व्यवस्था लागू होगी।

MSME सेक्टर के लिए संसद से पास हुए इस नए संशोधन कानून और बकाये भुगतान के सख्त नियमों पर आपकी क्या राय है? क्या इससे छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार हमारे साथ ज़रूर साझा करें।
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Saumya Pal
National Desk News Darshan

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