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बिहार बॉर्डर पर ₹50 लाख की ‘महा-छिपकली’ जब्त: अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी डिमांड; जानिए क्यों बिकती है करोड़ों में और क्या है इसका ड्रैगन कनेक्शन!

किशनगंज/पटना, नेशनल क्राइम डेस्क : बिहार में भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा के पास सुरक्षा एजेंसियों (SSB और स्थानीय पुलिस) ने वन्यजीव तस्करी के एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट को नाकाम करते हुए बेहद चौंकाने वाली कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने सीमावर्ती इलाके से एक अति-दुर्लभ प्रजाति की ‘टोके गेको’ (Tokay Gecko) छिपकली को बरामद किया है। इस ऑपरेशन में पुलिस ने मौके से तस्करों को भी दबोचा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस छोटी सी छिपकली की कीमत अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट (International Black Market) में ₹50 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक आंकी जा रही है। इस जब्ती के बाद से ही हर कोई हैरान है कि आखिर एक छिपकली की कीमत इतनी ज्यादा क्यों है।

क्या होती है ‘टोके गेको’ छिपकली? (What is Tokay Gecko)

‘टोके गेको’ एक बेहद दुर्लभ, अनोखी और रंग-बिरंगी छिपकली होती है, जिसके शरीर पर चमकीले नारंगी और नीले रंग के धब्बे (Spots) होते हैं।

  • नाम के पीछे की वजह: यह छिपकली दिखने में जितनी अलग है, इसकी आवाज भी उतनी ही अनूठी है। यह रात के समय ‘टॉक-के’ (Tok-Kay) जैसी तेज आवाज निकालती है, जिसके कारण इसका नाम ‘टोके गेको’ पड़ा है।
  • कहां पाई जाती है: यह मुख्य रूप से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (Northeast States जैसे असम, नागालैंड) के पहाड़ी जंगलों, बिहार के कुछ हिस्सों, नेपाल, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में पेड़ों पर पाई जाती है। जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण अब यह विलुप्त होने की कगार पर है।

क्यों है इसकी इतनी भारी कीमत? (The Medical Myth)

इस छिपकली की तस्करी सबसे ज्यादा चीन, इंडोनेशिया, फिलीपींस और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में की जाती है। इतनी भारी कीमत के पीछे कुछ बड़े अंधविश्वास और कारण हैं:

  • पारंपरिक चीनी दवाइयां (TCM): चीन के पारंपरिक चिकित्सा विज्ञान में माना जाता है कि इस छिपकली के शरीर से ‘गे जी’ (Ge Jie) नाम की दवा बनती है। वहां यह अंधविश्वास फैला हुआ है कि इसके सेवन से कैंसर, नपुंसकता, डायबिटीज और एड्स जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज संभव है, हालांकि विज्ञान में इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है।
  • ड्रैगन का वंशज और गुड लक: चीनी संस्कृतियों में एक मिथक यह भी है कि ये छिपकलियां ‘ड्रैगन’ के खानदान (Dragon Family) से ताल्लुक रखती हैं। इसलिए इन्हें घरों में पालतू जानवर के रूप में रखने से ‘गुड लक’ और समृद्धि आती है। कानूनन जुर्म: 7 साल तक की सजा का प्रावधान

भारत में ‘टोके गेको’ को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act) के तहत सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त है।

  • गैर-जमानती अपराध: इस छिपकली को पकड़ना, पालना या इसका व्यापार करना पूरी तरह से अवैध और एक गंभीर संघीय व गैर-जमानती अपराध है।
  • कड़ी सजा: इस जुर्म में पकड़े जाने पर तस्करों को अधिकतम 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। फिलहाल पुलिस ने पकड़ी गई छिपकली को सुरक्षित वन विभाग (Forest Department) को सौंप दिया है, जिसे वापस जंगलों में छोड़ दिया जाएगा। तस्करों से पूछताछ जारी है ताकि उनके पूरे नेटवर्क को तोड़ा जा सके। अंधविश्वास और कथित दवाइयों के नाम पर इस तरह दुर्लभ वन्यजीवों की तस्करी और प्रकृति के साथ खिलवाड़ किए जाने पर आपकी क्या राय है? क्या ऐसे तस्करों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार हमारे साथ ज़रूर साझा करें। देश के बड़े क्राइम अपडेट्स, वन्यजीव जगत की खबरों और हर एक कड़क व सच्ची रिपोर्ट को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज दर्शन News Darshan के साथ।

Saumya Pal
National Desk News Darshan

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