तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी राजनीतिक टूट की खबरों ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। पार्टी के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने दावा किया है कि उन्होंने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। यदि यह विलय आधिकारिक रूप से मान्य हो जाता है, तो लोकसभा में TMC की संख्या में बड़ी कमी आ सकती है और संसद का राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।
इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 20 सांसदों का यह विलय “अवैध राजनीतिक टूट” है, जिसे NDA की लोकसभा में संख्या बढ़ाने और भविष्य में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने की रणनीति के तहत कराया गया है। हालांकि, यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है और केंद्र सरकार या अमित शाह ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
वहीं, TMC नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) का उल्लंघन बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष से 20 बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि केवल सांसदों का किसी दूसरी पार्टी में जाने का दावा कर देना पर्याप्त नहीं है। संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत यह कानूनी विवाद इस बात पर टिका है कि क्या केवल संसदीय दल के दो-तिहाई सदस्यों का अलग होना “विलय” माना जा सकता है, या मूल राजनीतिक दल का भी औपचारिक विलय आवश्यक है। इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष हो सकता है।
बताया जा रहा है कि NCPI एक अपेक्षाकृत छोटा और कम चर्चित राजनीतिक दल है, जिसकी स्थापना 2022 में हुई थी और जिसने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में सीमित स्तर पर चुनाव लड़ा था। 20 बागी सांसदों के इसमें शामिल होने के दावे के बाद यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। फिलहाल लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस विलय को औपचारिक मान्यता दिए जाने का निर्णय लंबित है और उसी पर आगे की संसदीय स्थिति निर्भर करेगी।
Aarya Mishra
National Desk, News Darshan





