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वैश्विक मंच पर भारत का डंका: FATF का पहली बार ‘उपाध्यक्ष’ बना भारत; टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ मिली सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत

नई दिल्ली, विदेश मामलों की डेस्क: भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय अपराधों और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों पर लगाम लगाने वाली सबसे बड़ी वैश्विक संस्था, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हासिल की है। भारत को पहली बार सर्वसम्मति से FATF का नया उपाध्यक्ष (Vice-President) चुना गया है। वैश्विक कूटनीति के नजरिए से इसे मोदी सरकार की एक बहुत बड़ी और रणनीतिक जीत माना जा रहा है। अब तक भारत इस संस्था में एक सदस्य देश के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहा था, लेकिन अब सीधे लीडरशिप (नेतृत्व) की कमान हाथ में आने से मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फंडिंग और साइबर अड़चनों के खिलाफ भारत की वैश्विक लड़ाई को एक नई और अभूतपूर्व ताकत मिलने वाली है।

क्या है FATF और क्यों इस पद का मिलना बेहद खास है?

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतर-सरकारी संस्था है, जिसका गठन 1989 में जी-7 (G7) देशों की पहल पर किया गया था। इसका मुख्य काम दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को वैध बनाना), आतंकवादियों को मिलने वाले पैसे (Terror Funding) और सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए कड़े नियम और मानक तय करना है। जो देश इन नियमों का पालन नहीं करते, FATF उन्हें अपनी ‘ग्रे लिस्ट’ या ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाल देता है, जिससे उन देशों को आईएमएफ (IMF) या वर्ल्ड बैंक जैसे वैश्विक संगठनों से कर्ज मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। ऐसे में, इस ताकतवर संस्था के उपाध्यक्ष पद पर भारत का बैठना यह साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय वित्तीय पारदर्शिता और आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीतियों और उसकी साफ-सुथरी साख पर कितना गहरा भरोसा करता है।

भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता: पाकिस्तान और चीन पर कसेगा शिकंजा

विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस पद पर भारत के आने से पड़ोसी देशों, खासकर पाकिस्तान और चीन जैसे देशों की रातों की नींद उड़ने वाली है। भारत लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता है और उसे वित्तीय मदद मिलती है। हालांकि पाकिस्तान कुछ समय पहले ही ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकला है, लेकिन अब नीति निर्धारण (Policy Making) के मुख्य स्तर पर भारत की मौजूदगी से पाकिस्तान किसी भी तरह की टेरर फंडिंग की चालाकी दोबारा नहीं कर पाएगा। इसके अलावा, आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का बचाव करने वाले चीन को भी अब भारत के कड़े रुख के आगे झुकना पड़ेगा।

भारत को क्या मिलेगी ताकत और क्या होगी जिम्मेदारी?

FATF का उपाध्यक्ष बनने के बाद भारत को इस वैश्विक संस्था के भीतर कई महत्वपूर्ण शक्तियां और जिम्मेदारियां मिलेंगी। भारत अब सीधे तौर पर उन देशों की समीक्षा (Review) करने वाली कमिटियों का हिस्सा होगा, जिन पर मनी लॉन्ड्रिंग या टेरर फंडिंग के संदिग्ध आरोप होते हैं। इसके साथ ही, भारत डिजिटल करेंसी (Cryptocurrency) और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए हो रहे अवैध वित्तीय लेन-देन के खिलाफ नए वैश्विक नियम बनाने में अगुवाई करेगा। इस पद के जरिए भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और अधिक मजबूती से कर सकेगा और पूरी दुनिया को यह संदेश देने में कामयाब होगा कि भारत केवल उपदेश नहीं देता, बल्कि वैश्विक वित्तीय सुरक्षा को नियंत्रित करने की पूरी क्षमता भी रखता है।

भारत को पहली बार FATF का उपाध्यक्ष चुने जाने और टेरर फंडिंग के खिलाफ इस महा-जीत को आप किस तरह देखते हैं? क्या आपको लगता है कि इस कदम से पाकिस्तान और चीन समर्थित आतंकवाद पर पूरी तरह रोक लग पाएगी?

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आदित्य ठाकुर

अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो, न्यूज़ दर्शन (News Darshan)

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