नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस के एडिशनल डीसीपी (New Delhi) संदीप लांबा को उनके पद और सुरक्षा ड्यूटी से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद की गई है, जिसमें पुलिस अधिकारी एक महिला प्रदर्शनकारी को सरेआम थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और यह पूरा मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है।
क्या है पूरा मामला?
जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और छात्र संगठनों द्वारा ‘चलो संसद’ मार्च का आयोजन किया गया था। यह प्रदर्शन NEET पेपर लीक और युवाओं से जुड़े अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ किया जा रहा था। मार्च के दौरान जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।
इसी अफरा-तफरी के बीच सोशल मीडिया पर एक 36 सेकंड का वीडियो तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा बिना किसी उकसावे के, एक महिला छात्र प्रदर्शनकारी को जोरदार थप्पड़ मार देते हैं, जो उस समय किसी भी हिंसक गतिविधि में शामिल नहीं थी। वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई
वीडियो के व्यापक विरोध और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने संदीप लांबा को नई दिल्ली जिला सुरक्षा ड्यूटी से हटाकर उनके पैरेंट स्टेशन (उत्तर-पूर्वी जिला) वापस भेज दिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, झड़प के दौरान अधिकारी ने अपना आपा खो दिया था। इस घटना में संदीप लांबा को भी कुछ मामूली चोटें आई थीं, लेकिन एक निहत्थी महिला पर हाथ उठाने की कार्रवाई को वरिष्ठ अधिकारियों ने अनुशासनहीनता और पद का दुरुपयोग माना।
दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा मामला
यह विवाद केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली में पुलिस बर्बरता के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट के सामने आया। कोर्ट में वरिष्ठ वकीलों ने वीडियो का हवाला देते हुए पुलिस अधिकारी के इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि जंतर-मंतर और उसके आसपास के सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और घटना से जुड़े वीडियो साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 11 सितंबर को होनी तय हुई है।
दर्ज हुई एफआईआर (FIR) की शिकायत
पीड़ित पक्ष और प्रदर्शनकारी संगठनों ने इस मामले को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत गैर-जमानती मामला दर्ज करने की मांग की गई है। इसमें मुख्य रूप से:
धारा 74 : महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
धारा 198 : लोक सेवक (Public Servant) द्वारा कानून की अवज्ञा करना।
निष्कर्ष
इस घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस के संयम और महिलाओं की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ पुलिस का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग जरूरी था, वहीं कोर्ट और जनता के बीच इस तरह के व्यवहार को लेकर भारी आक्रोश है। अब सभी की नजरें 11 सितंबर को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।
रिया मिश्रा
नेशनल डेस्क | न्यूज़ दर्शन





