महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में जांच के दौरान एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पूरे सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पेपर लीक के मास्टरमाइंड ने प्रश्नपत्र को प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकालने के लिए बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला तरीका अपनाया।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने परीक्षा के प्रश्नपत्र को अपने जूते के अंदर छिपाकर प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाला। इस तरीके का इस्तेमाल इसलिए किया गया ताकि सुरक्षा जांच के दौरान किसी को उस पर शक न हो और प्रश्नपत्र आसानी से बाहर पहुंचाया जा सके। इसके बाद इस प्रश्नपत्र को केवल ₹8,000 में एक ऐसे नेटवर्क के जरिए बेचा गया, जहां जानबूझकर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए थे, ताकि किसी भी तरह की गतिविधि रिकॉर्ड न हो सके।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, पूरा रैकेट पहले से सुनियोजित था। पेपर बाहर निकालने से लेकर खरीदारों तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी तय की गई थी। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस गिरोह के तार कई अन्य लोगों से भी जुड़े हो सकते हैं और पेपर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया होगा।
पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों की पहचान करने में जुटी है। आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन और आपसी संपर्कों की भी जांच की जा रही है। इसके साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इससे पहले हुई किसी परीक्षा में भी इसी तरह की साजिश रची गई थी।
इस मामले के सामने आने के बाद परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील परीक्षा केंद्रों और प्रिंटिंग प्रेसों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और मामले के हर पहलू की गहन जांच जारी है।
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