बुलढाणा/बुरहानपुर, नेशनल क्राइम ब्यूरो : महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा से सटी एक ऐसी सनसनीखेज और झकझोर देने वाली पुलिसिया लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरे कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने बिना किसी वैज्ञानिक पुष्टि (DNA टेस्ट) के, सिर्फ शक और मारपीट के दम पर एक बेगुनाह पिता और उसके बेटे को ‘बेटी का हत्यारा’ बनाकर जेल की कालकोठरी में डाल दिया। 22 दिनों तक नरक भोगने के बाद इस कहानी में तब भूचाल आ गया, जब वह ‘मृत’ बेटी खुद जिंदा चलकर थाने पहुंच गई। यह मामला इतना गंभीर रूप ले चुका है कि खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को विधानसभा में इस बड़ी चूक को स्वीकार करना पड़ा है।
क्या है पूरा मामला और असली नाम? (The True Story)
यह हैरान करने वाली घटना मध्य प्रदेश के बुरहानपुर और महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले से जुड़ी है। बुरहानपुर की रहने वाली शिवानी नाम की एक लड़की अचानक अपने घर से लापता हो गई थी, जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट उसके पिता ने दर्ज कराई थी। इसके कुछ दिनों बाद महाराष्ट्र के बुलढाणा के जंगलों में पुलिस को एक अज्ञात युवती की सिर कटी और जली हुई लाश मिली।
जबरन कबूलनामा और बेगुनाहों पर जुल्म
बुलढाणा पुलिस ने बिना किसी पुख्ता सबूत या डीएनए (DNA) जांच के, उस जली हुई लाश को लापता ‘शिवानी’ मान लिया। इसके बाद पुलिस ने शिवानी के पिता बापूराव और उसके भाई अजय को हिरासत में ले लिया। आरोप है कि महाराष्ट्र पुलिस ने बिना किसी कॉल रिकॉर्डिंग या सबूत के, केवल संदेह के आधार पर पिता-पुत्र की बेरहमी से पिटाई की और दबाव बनाकर हत्या का जुर्म कबूल करवा लिया। इसके बाद बेकसूर पिता-पुत्र (बापूराव और अजय) को जेल भेज दिया गया, जहां उन्होंने 22 लंबे दिन काटे।
28 मई को आया सनसनीखेज मोड़
केस पूरी तरह बंद होने की कगार पर था, लेकिन 28 मई को इस मामले में ऐसा मोड़ आया जिसने पुलिस के होश उड़ा दिए। जिस शिवानी की हत्या के इल्जाम में उसका पूरा परिवार जेल में सड़ रहा था, वह खुद जिंदा चलकर मध्य प्रदेश के खकनार थाने पहुंच गई। उसने पुलिस के सामने खड़े होकर साफ कहा कि वह जिंदा है। शिवानी के जिंदा सामने आते ही महाराष्ट्र पुलिस की इस बर्बरता और भयंकर लापरवाही की पोल पूरी दुनिया के सामने खुल गई।
थाने पहुंची ‘मुर्दा’ बेटी, तो खुली पुलिस की पोल
इधर पिता जेल में था और उधर पुलिस केस बंद करने की तैयारी में थी, तभी वह लड़की खुद पुलिस थाने पहुंच गई। असल में, वह लड़की अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी और किसी दूसरे शहर में रह रही थी। जब उसे सोशल मीडिया या खबरों के जरिए पता चला कि उसके पिता को उसकी ‘हत्या’ के जुर्म में जेल भेज दिया गया है, तो वह दंग रह गई और तुरंत मुंबई के संबंधित थाने पहुंची।
लड़की के जिंदा सामने आने के बाद अब मुंबई पुलिस के सामने दो बड़े और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं:
पहला सवाल: जब असली बेटी जिंदा है, तो पुलिस ने जिस अज्ञात शव का अंतिम संस्कार करवाया था, वह आखिर किसकी बेटी थी?
दूसवा सवाल: बिना किसी साइंटिफिक सबूत या डीएनए मैचिंग के एक बेगुनाह पिता को जेल भेजने वाली पुलिस टीम पर क्या कार्रवाई होगी?
अदालत ने अब इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और बेगुनाह पिता को तुरंत रिहा करने का आदेश देते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर से इस घोर लापरवाही पर जवाब तलब किया है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में माना, अधिकारियों पर गिरी गाज
एक बेगुनाह परिवार को बिना सबूत प्रताड़ित करने और जेल भेजने का यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में भी तेजी से गरमा गया। इस भीषण लापरवाही को लेकर जब बवाल बढ़ा, तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने खुद विधानसभा (Assembly) में पुलिस की इस गंभीर चूक को स्वीकार किया। सरकार की तरफ से तुरंत कड़ा एक्शन लेते हुए इस मामले से संबंधित दोषी पुलिस अधिकारियों और जांच टीम पर निलंबन (Suspension) की गाज गिरा दी गई है।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगर शिवानी जिंदा है, तो बुलढाणा के जंगलों में मिली वह सिर कटी और जली हुई लाश आखिर किसकी थी? पुलिस अब नए सिरे से उस अज्ञात शव की पहचान और असली कातिलों की तलाश में जुट गई है।
बिना डीएनए (DNA) जांच और सिर्फ मारपीट के दम पर बेकसूर पिता-पुत्र को जेल भेजने वाली पुलिसिया कार्यप्रणाली पर आप क्या सोचते हैं? क्या ऐसे मामलों में पीड़ितों को भारी मुआवजा मिलना चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। देश के सबसे बड़े और खोजी क्राइम अपडेट्स, विधानसभा की हलचल और हर एक कड़क व सच्ची रिपोर्ट को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन News Darshan के साथ।
Saumya Pal
National Desk News Darshan





