अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के शुरुआती जमीन विवादों के शांत होने के बाद, अब हाल के दिनों में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला जमीन खरीद का नहीं बल्कि मंदिर को मिलने वाले ‘चंदा’ (Donations) और दान के पैसों के प्रबंधन से जुड़ा हुआ है।
सोशल मीडिया से लेकर कतिपय मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जाने लगा है कि राम मंदिर के नाम पर देश-विदेश से जो अरबों रुपए का चंदा इकट्ठा हुआ है, उसके रख-रखाव, ऑडिट और बैंक खातों के संचालन में बड़ी वित्तीय गड़बड़ी या अपारदर्शिता बरती जा रही है।
इन चर्चाओं के बाद आम भक्तों और जनता के बीच यह भ्रम फैलने लगा कि क्या रामलला के चरणों में अर्पित किए गए समर्पण कोष का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है? इस गंभीर विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए जब बैंकिंग और ट्रस्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड्स की पड़ताल की गई, तो इस पूरे ‘चंदा विवाद’ के पीछे की असली तकनीकी वजह और पूरी सच्चाई सामने आ गई।
वास्तव में, हालिया विवाद की मुख्य जड़ कोई वित्तीय घोटाला नहीं, बल्कि मंदिर काउंटर और ऑनलाइन माध्यमों से आने वाले दान की अत्यधिक मात्रा और तकनीकी मिसमैनेजमेंट है।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं, जिससे दानपात्रों में सोने-चांदी के आभूषणों के साथ-साथ भारी मात्रा में नकदी (Cash) और चेक जमा हो रहे हैं। ट्रस्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस भारी-भरकम कैश को रोजाना गिनने, बैंक में जमा करने और बाउंस हो रहे चेकों के मिलान को लेकर आ रही है; स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और अन्य बैंकों के स्टाफ को इस काम के लिए अलग से तैनात करना पड़ा है।
इसके अलावा, देश भर में कई फर्जी वेबसाइट्स और फर्जी क्यूआर (QR) कोड बनाकर राम मंदिर के नाम पर अवैध रूप से चंदा वसूलने वाले कई गिरोह सक्रिय हो गए थे, जिन्हें हाल ही में साइबर क्राइम सेल ने पकड़ा है। इसी ऑनलाइन धोखाधड़ी और बैंक खातों के ऑडिट में हो रही देरी को कुछ असामाजिक तत्वों ने ‘चंदे का घोटाला’ बताकर सोशल मीडिया पर हवा दे दी, जबकि सच्चाई यह है कि ट्रस्ट के मुख्य खातों में जमा करीब 3,500 करोड़ रुपए से अधिक की राशि पूरी तरह सुरक्षित है और उस पर आने वाले ब्याज से ही मंदिर का आगे का निर्माण कार्य पारदर्शिता के साथ कराया जा रहा है।
संसद और कानूनी स्तर पर भी ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट पूरी तरह पारदर्शी है, क्योंकि गृह मंत्रालय के एफसीआरए (FCRA) नियमों के तहत विदेशी चंदे और देश के भीतर से आए एक-एक रुपए का हिसाब चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) की निगरानी में रखा जा रहा है। अदालतों और वित्तीय जांच एजेंसियों ने भी इन अफवाहों को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ किया है कि भक्तों द्वारा दिए गए चंदे में किसी भी तरह की हेराफेरी नहीं हुई है, बल्कि बैंकों के साथ मिलकर अब एक ऐसा ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया जा रहा है जिससे दान की गई पाई-पाई का रसीद और मैसेज सीधे डोनर के मोबाइल पर पहुंच सके।
राम मंदिर के चंदे के प्रबंधन और इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर उड़ने वाली अफवाहों पर आपकी क्या राय है? क्या डिजिटल डोनेशन को और अधिक सख्त और सुरक्षित बनाया जाना चाहिए? हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर अपनी राय जरूर बताएं। देश के आर्थिक और प्रशासनिक गलियारों से लेकर ग्राउंड जीरो की ऐसी ही हर एक बड़ी खबर और सच्चे विश्लेषण को सबसे पहले में देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज दर्शन (News Darshan) के साथ।
Saumya Pal
National Desk News Darsan




