देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में पूर्वोत्तर भारत से एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। एक महत्वपूर्ण कदम के तहत केंद्र सरकार ने असम और नागालैंड सरकारों के साथ कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज तथा उत्पादन के लिए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता दोनों राज्यों के सीमा क्षेत्रों में मौजूद विशाल हाइड्रोकार्बन संसाधनों के दोहन का मार्ग प्रशस्त करेगा। इससे नए निवेश आकर्षित होंगे, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी। केंद्र सरकार ने इस समझौते को लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों के समाधान और पूर्वोत्तर की अपार ऊर्जा क्षमता के उपयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
यह त्रिपक्षीय समझौता पूर्वोत्तर भारत की अब तक अप्रयुक्त हाइड्रोकार्बन संपदा के दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इस समझौते के तहत केंद्र सरकार, असम और नागालैंड मिलकर उन क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देंगे, जो वर्षों से पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो सके थे।
सहयोग के लिए एक स्पष्ट और व्यवस्थित ढांचा तैयार कर यह समझौता प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और बड़े ऊर्जा परियोजनाओं का रास्ता खोलने का काम करेगा। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह पहल पूर्वोत्तर को देश के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में शामिल कर सकती है।
केंद्र सरकार का मानना है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन के विशाल और अप्रयुक्त भंडार मौजूद हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि अकेले असम में देश के कुल कच्चे तेल भंडार का लगभग 22 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस भंडार का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। नए क्षेत्रों में खोज और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देकर सरकार घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना चाहती है, जिससे महंगे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सके।
इस समझौते को सहकारी संघवाद यानी Cooperative Federalism का एक मजबूत उदाहरण भी माना जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों ने साझा विकास लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। सीमा विवाद जैसे लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों के बावजूद असम और नागालैंड ने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए सहयोग का रास्ता चुना है, ताकि क्षेत्र के बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह “नेशन फर्स्ट” और सहकारी संघवाद की भावना का प्रतीक है। अमित शाह ने कहा कि तेल और प्राकृतिक गैस राष्ट्रीय संपत्ति हैं और असम तथा नागालैंड ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते से क्षेत्र की तेल उत्पादन क्षमता में दस गुना से अधिक वृद्धि संभव है, जो भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह त्रिपक्षीय समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वर्तमान में देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में पूर्वोत्तर क्षेत्र में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों का विकास कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन को बढ़ाएगा तथा आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा। यह पहल ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और दीर्घकालिक ऊर्जा स्थिरता की दिशा में सरकार के विजन के अनुरूप है।
अधिकारियों का मानना है कि इस समझौते के तहत तैयार किया गया सहयोगात्मक ढांचा तेल और गैस खोज में लगी कंपनियों के लिए एक स्थिर और निवेश-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि स्थानीय समुदायों और राज्य सरकारों के हितों की भी पूरी तरह रक्षा हो। केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में असम और नागालैंड का यह साझा प्रयास क्षेत्र की अप्रयुक्त हाइड्रोकार्बन क्षमता को उजागर कर सकता है और पूर्वोत्तर भारत को देश के प्रमुख ऊर्जा केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है।
भारत जब ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और तेज आर्थिक विकास के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तब केंद्र, असम और नागालैंड के बीच हुआ यह त्रिपक्षीय समझौता पूर्वोत्तर भारत के लिए नए अवसरों का द्वार खोल सकता है। यह साझेदारी न केवल क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करेगी, बल्कि रोजगार, निवेश और विकास के नए आयाम भी स्थापित करेगी|
Shreya singh,
National Desk,News Darshan.





