नई दिल्ली : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह भारतीय जवानों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) की ‘रोल ऑफ ऑनर’ सूची में शामिल किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर शहीदों की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि देश के वीर जवानों की शहादत कभी नहीं छिपाई गई और उन्हें पहले ही पूरा सम्मान दिया जा चुका है।
दरअसल, मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के पाँच और भारतीय वायुसेना के एक जवान ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। हाल ही में इन सभी छह जवानों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की ‘रोल ऑफ ऑनर’ सूची में जोड़े गए, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का कारण बन गया।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने करीब एक साल बाद शहीदों के नाम सार्वजनिक किए और संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह कहकर सदन को गुमराह किया था कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय पक्ष को कोई नुकसान नहीं हुआ। विपक्ष का कहना है कि अब युद्ध स्मारक की सूची में नाम जुड़ने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
इन आरोपों पर रक्षा मंत्रालय ने विस्तृत सफाई देते हुए कहा कि शहीद जवानों की जानकारी कभी नहीं छिपाई गई। मंत्रालय के मुताबिक, संसद में रक्षा मंत्री का बयान उन भ्रामक खबरों के संदर्भ में था, जिनमें भारतीय वायुसेना के पायलटों की मौत के दावे किए जा रहे थे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उस बयान का उद्देश्य अफवाहों का खंडन करना था, न कि वास्तविक शहादत को छिपाना।
रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सभी छह जवानों को 14 अगस्त 2025 को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका था। उनके परिवारों को भी सैन्य परंपराओं के अनुसार पूरा सम्मान दिया गया। मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की ‘रोल ऑफ ऑनर’ सूची में नाम जोड़ना एक औपचारिक और प्रशासनिक प्रक्रिया है, इसलिए इसमें समय लगना सामान्य बात है।
फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी जारी है, लेकिन रक्षा मंत्रालय का कहना है कि देश के वीर जवानों के सम्मान में किसी तरह की कोई कमी नहीं की गई और उनकी शहादत को हमेशा सर्वोच्च सम्मान दिया गया।
Druti jha
National desk, News Darshan




