भारत और सेशेल्स के बीच प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार, डिजिटल कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण (Capacity Building) को मजबूत करना है। दोनों देशों ने अपने संबंधों को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित सेशेल्स भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और यह समझौते भारत की समुद्री सुरक्षा तथा क्षेत्रीय प्रभाव को और मजबूत करेंगे।
सेशेल्स हिंद महासागर में एक छोटे द्वीपीय देश होने के बावजूद सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों (Sea Lanes of Communication) के पास स्थित है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार गुजरता है। भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने, तस्करी और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेशेल्स के साथ मिलकर काम करता रहा है। नए समझौतों से दोनों देशों के बीच समुद्री निगरानी, तटरक्षक सहयोग और रक्षा साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।
भारत को इन समझौतों से सबसे बड़ा लाभ हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने के रूप में मिलेगा। इससे भारत को क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के लिए सहयोग और समन्वय भी बढ़ेगा।
आर्थिक क्षेत्र में भी दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक, फिनटेक, स्वास्थ्य, शिक्षा, ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy), समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इससे भारतीय कंपनियों के लिए सेशेल्स में निवेश और नई परियोजनाओं के अवसर बढ़ेंगे। दोनों देशों के बीच पर्यटन और लोगों के आपसी संपर्क (People-to-People Ties) को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
भारत ने सेशेल्स के विकास में सहयोग जारी रखने का भरोसा दिया है।
भारत पहले भी सेशेल्स को रक्षा उपकरण, तटरक्षक जहाज, समुद्री निगरानी प्रणाली, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सहायता प्रदान करता रहा है। नए समझौते इस सहयोग को और व्यापक बनाएंगे तथा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की “SAGAR” (Security and Growth for All in the Region) नीति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये समझौते केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इससे भारत की क्षेत्रीय कूटनीतिक स्थिति मजबूत होगी, समुद्री व्यापार मार्ग अधिक सुरक्षित होंगे और इंडो-पैसिफिक में भारत की रणनीतिक भूमिका को नई मजबूती मिलेगी।
Aarya Mishra
National Desk, News Darshan




